करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा दर्शन की असली वजह जानिए
सुहागिन महिलाओं और अविवाहित लड़कियों के लिए करवा चौथ के पर्व का विशेष महत्व है। करवाचौथ की शाम सुहागन स्त्रियां छलनी से चांद देखकर व्रत खोलती हैं। इसलिए अमीर हो या गरीब सभी व्रत रखने वाली महिलाएं इस अवसर पर नई छलनी खरीदती हैं। व्रत की शाम छलनी की पूजा करके चांद को देखते हुए प्रार्थना करती हैं कि उनका सौभाग्य और सुहाग सलामत रहे।
- Written By: सीमा कुमारी
करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा दर्शन (सो.सोशल मीडिया)
karwa chauth 2024:पति-पत्नी के बीच अटूट विश्वास एवं प्यार का पावन पर्व करवा चौथ इस साल 20 अक्टूबर,रविवार को पूरे देश भर में मनाया जाएगा। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, उनके अच्छे स्वास्थ्य और जन्म-जन्मांतर तक उन्हें अपने पति के रूप में पाने के लिए करती है। आपको बता दें, पति-पत्नी के अटूट बंधन का ये पावन व्रत हर विवाहित नारी के मन को एक सुखद अनुभूति का एहसास दिलाता है।
इस दिन विवाहित महिलाएं पूरा दिन बिना अन्न और जल के रहती हैं। व्रती महिलाएं रात में चांद को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं। इस व्रत में चंद्रमा की पूजा के अलावा करवा माता, भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती और कार्तिकेय जी की उपासना की जाती है। ऐसे में आइए जानते है इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों के बारे में –
आखिर छलनी से क्यों देखा जाता है चांद
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी ने चंद्रदेव को कलंकित होने का श्राप दिया था। इस वजह से करवा चौथ पर सीधे तौर पर चंद्र दर्शन नहीं किया जाता है। इसके साथ ही इसके अशुभ परिणामों से बचने के लिए छलनी का उपयोग किया जाता है। ताकि व्यक्ति को किसी प्रकार की नकारात्मकता का सामना न करना पड़े।
इसलिए रखा जाता हैं छलनी पर दीया
छलनी में दीपक रखने को लेकर ऐसा कहा जाता है कि यह पवित्र दीपक अपनी लौ के जरिए जीवन के अंधकार को दूर करता है। साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसके अलावा यह कलंक के प्रभाव को भी कम करता है।
इसके अलावा मान्यता है कि छलनी पर दीया रखकर चंद्रमा के दर्शन करने से पति का भाग्य उदय होता है और उनके जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इसके अलावा, कहा गया है कि, चंद्रमा को छलनी से देखने पर सुहागन महिला को जीवन में कोई कलंक नहीं लगता और उसके पति का भी भाग्योदय होता है।
धर्म शास्त्रों में भी लिखा गया है कि अगर पूजा अनुष्ठान में कोई भूल होती है तो दीया जलाने से उस भूल से मुक्ति मिलती है और पूजा के दौरान किसी प्रकार का दोष भी नहीं लगता है।
