

Pitru Paksha Mein Kya Nahi Khana Chahiye: हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष की शुरुआत हो जाती है और यह अमावस्या तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि करते है। धर्म एवं लोक मान्यता के अनुसार, इन 16 दिनों की अवधि में पितरों की शांति और तृप्ति के लिए आहार से जुड़े कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है। ऐसे में आज हम आपको बताते है पितृ पक्ष में आहार से जुड़े नियमों के बारे में।
धर्म एवं लोक मान्यता के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान प्याज और लहसुन का सेवन करने की मनाही होती है। ये दोनों चीजें को हिन्दू धर्म में राजसिक या तामसिक प्रकृति वाला माना गया है। इसलिए पितृपक्ष के दौरान इन चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
धर्म ग्रथों के अनुसार,पितृ पक्ष के दौरान खानपान में विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासतौर पर इस दौरान तामसिक भोजन यानी मांस, मछली,अंडे का सेवन करने से बचना चाहिए।
पितृपक्ष के दौरान तामसिक भोजन के अलावा, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से भी दूर रहने को कहा जाता है। यह समय पूर्वजों के प्रति सम्मान और आत्मसंयम का होता है। इसलिए इन दिनों नशे से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
पितृपक्ष के दौरान बहुत मसालेदार भोजन खाने से भी बचना चाहिए। इस दौरान सादा और सात्त्विक भोजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि हल्का और सात्त्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और श्रद्धा व संयम के साथ पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मों पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।
पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की तिथि के दिन जल में काले तिल, कुशा और जौ मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें।
इस दौरान जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और अपनी क्षमतानुसार अन्य चीजों का दान करें।
गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों के लिए भोजन का एक हिस्सा जरूर निकालें। मान्यता है कि इससे पितृ तृप्त होते हैं।
पितृपक्ष के दौरान हर रोज सुबह और शाम को पितरों के निमित्त दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके दीपक जलाएं।