2025 की अंतिम पूर्णिमा इस दिन, क्यों विशेष है मार्गशीर्ष पूर्णिमा, नोट कीजिए शुभ मुहूर्त
Margashirsha Purnima puja vidhi : मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और पूजा करने से साधकों को शुभ फल की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। जानिए कब है मार्गशीर्ष पूर्णिमा
- Written By: सीमा कुमारी
कब मनाई जाएगी साल की आखिरी पूर्णिमा (सौ.सोशल मीडिया)
Margashirsha Purnima Kab Hai 2025: साल 2025 अब समापन की तरफ बढ़ रहा है। साथ ही, साल की आखिरी पूर्णिमा भी आने वाली है। शास्त्रों के अनुसार, हर महीने में पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस बार साल की आखिरी पूर्णिमा 04 दिसंबर को मनाया जाएगा। यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी और शिव पूजन को समर्पित है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और पूजा करने से साधकों को शुभ फल की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कब मनाई जाएगी मार्गशीर्ष पूर्णिमा।
कब मनाई जाएगी साल की आखिरी पूर्णिमा
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 04 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 05 दिसंबर को 04 बजकर 43 मिनट पर होगा। ऐसे में 04 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।
सम्बंधित ख़बरें
Hindu Tradition: परीक्षा या किसी शुभ काम से पहले दही-चीनी क्यों खिलाई जाती है? जानिए इसके आयुर्वेदिक महत्व
Ganesh Chalisa: बुधवार को इस विधि से करें श्री गणेश चालीसा का पाठ, हर संकट होगा दूर
Vastu Tips: आर्थिक तंगी से हैं परेशान? दीपक का ये उपाय बदल सकता है आपकी तकदीर
श्रीकृष्ण जन्मभूमि कार सेवा पर स्वामी सच्चिदानंद का ऐलान, 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में होगा भूमि पूजन
कैसे करें मार्गशीर्ष पूर्णिमा पूजा
- इस पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनाराण की पूजा की जाती है।
- प्रातःकाल उठकर भगवान का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
- स्नान के बाद सफेद कपड़े पहनें और फिर आचमन करें।
- इसके बाद ऊँ नमोः नारायण कहकर श्रीहरि का आह्वान करें।
- सत्यनारायण भगावन के चित्र या तस्वीर को पाट पर स्थापित करके आसन, गंध और पुष्प आदि
- भगवान को अर्पण करें।
- भगवान को पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करें और उनकी आरती उतारें।
- इसके बाद भगवान सत्यनाराण की कथा सुनें।
- आप चाहे तो हवन भी कर सकते हैं। हवन में तेल, घी और बूरा आदि की आहुति दें।
- रात्रि को भगवान नारायण की मूर्ति के पास ही शयन करें।
- व्रत के दूसरे दिन किसी गरीब को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर उन्हें विदा करने के बाद व्रत का पारण करें।
सनातन धर्म में मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व
सनातन धर्म में इस दिन स्नान, दान और तप का विशेष महत्व बताया गया है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के शुभ दिन पर हरिद्वार, बनारस, मथुरा और प्रयागराज आदि जगहों पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान और तप करते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का महत्व है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन हरिद्वार, बनारस, मथुरा और प्रयागराज आदि जगहों पर श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान और तप आदि करते हैं।
इस दिन दान देने का खासा महत्व है। किसी जरूरतमंद को वस्त्र, भोजन आदि का यथाशक्ति दान करें। इस दिन किए जाने वाले दान का फल अन्य पूर्णिमा की तुलना में 32 गुना अधिक मिलता है, इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
यह भी पढ़ें-अभिजीत मुहूर्त में ही क्यों होते हैं भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण, जानिए
पौराणिक मान्याताओं के अनुसार मार्गशीर्ष माह से ही सतयुग काल आरंभ हुआ था। इस दिन तुलसी की जड़ की मिट्टी से पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। इस भगवान सत्यनारायण की पूजा करना और कथा सुनने का महत्व है। यह परम फलदायी बताई गई है।
