सावन की शिवरात्रि की महिमा है अपरंपार, जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त भी
मासिक शिवरात्रि व्रत करने से अविवाहित जातकों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। साथ ही सुख और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानें साल 2025 में सावन माह में शिवरात्रि का पर्व किस दिन पड़ेगा।
- Written By: सीमा कुमारी
सावन शिवरात्रि (सौ.सोशल मीडिया)
Sawan Shivratri 2025 : सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने में पड़ने वाले मासिक शिवरात्रि व्रत का अपना अलग ही महत्व है। जैसा कि, आप जानते हैं कि मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखी जाती है, लेकिन जब यह तिथि सावन महीने में पड़ती है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना अधिक हो जाता c।
आपको बता दें, इस बार सावन महीने की सावन शिवरात्रि का व्रत 23 जुलाई, बुधवार को रखा जाएगा। सावन शिवरात्रि के दिन हजारों की संख्या में भक्त शिव मंदिरों में भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सावन माह की शिवरात्रि का दिन कांवड़ यात्रा का आखिरी दिन भी होता है। ऐसे में इस दिन को सनातन धर्म में बेहद शुभ और फलदायी माना गया है।
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बता दें, श्रावण माह की शिवरात्रि के दिन मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है और भक्त गंगाजल शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। ऐसे में आइए जानें साल 2025 में सावन माह में शिवरात्रि का पर्व किस दिन पड़ेगा।
कब मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि 2025
साल 2025 में सावन शिवरात्रि 23 जुलाई, 2025 बुधवार को पड़ेगी और इसी दिन शिवरात्रि का व्रत भी किया जाएगा। इस दिन निशिता काल में पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व है।
सावन मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
सावन मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष पूजा रात्रि के समय की जाती है, जिसे निशिता काल कहा जाता है। इस बार पूजा का सर्वोत्तम समय 24 जुलाई को रात 12:07 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में कुल 41 मिनट का समय होगा, जो कि शिव पूजन और जलाभिषेक के लिए सबसे शुभ माना गया है।
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ऐसे करें सावन शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा :
- इस दिन सुबह नित्य कर्म करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- सुबह मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और ‘ऊं नम: शिवाय:’ मंत्र का जाप करें।
- सावन माह की शिवरात्रि के दिन भक्तों को एक समय ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।
- सावन शिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा चार पहर होती है।
- शिवरात्रि के दिन सन्ध्याकाल में पूजा का विशेष महत्व होता है।
- साथ ही व्रत का पारण अगले दिन करना चाहिए।
- भक्तों को सूर्योदय व चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के बीच के समय में ही व्रत का समापन करना चाहिए।
- ऐसी मान्यता है कि शिव पूजा और पारण दोनों चतुर्दशी तिथि अस्त होने से पहले करना चाहिए।
