

Bach Baras Kab Hai : बछ बारस द्वादशी का पर्व हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इसे नंदिनी व्रत और गोवत्स द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस पर्व को माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती है। इस बार यह पर्व 07 सितंबर 2026 सोमवार के दिन रहेगा।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, बछ बारस द्वादशी तिथि 7 सितंबर को शाम 5: 03 मिनट पर शुरु होकर 8 सितंबर को दोपहर 2: 42 मिनट तक। ऐसे में बछ बारस का पर्व सोमवार, 7 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 6 : 36 मिनट से रात 8 : 53 मिनट कर रहेगा।
सनातन हिन्दू धर्म बछ बारस का बड़ा महत्व है। इस पर्व में गाय और उसके बछड़े का पूजन का महत्व बताया गया है। इस दिन गौ माता और उनके बछड़े की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन गाय और उसके बछड़े का पूजन करने से भगवान श्री कृष्ण की असीम कृपा प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया व्रत संतान पर आने वाले सभी संकटों को हर लेता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
बछ बारस के दिन सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
इसके बाद गाय और उसके बछड़े को स्नान कराएं या स्वच्छ जल से छिटकाव करें।
दोनों के सींगों और माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं। उन्हें ओढ़नी/वस्त्र और माला अर्पित करें।
विधि-विधान पूर्वक गौमाता व बछड़े की पूजा करें।
इस दिन घर में मिट्टी व गोबर आदि से बनी तलैया (बावड़ी) बनाएं और उसे फूलों आदि से सजाया जाता है।
अब इसमें कच्चा दूध और पानी भरकर कुमकुम, मौली, धूप दीप प्रज्वलित कर पूजा करें।
इसके बाद बछ बारस व्रत की कथा सुनें।
इसी के साथ इस दिन गाय को रोली का टीका लगाकर हरा चारा खिलाएं व परिवार की खुशहाली के लिए कामना भी करें।