कुंभ संक्रांति (सौ.सोशल मीडिया)
Kumbh Sankranti 2025: सनातन धर्म में कुंभ संक्रांति का बड़ा महत्व है। इस साल कुंभ संक्रांति का पर्व 13 फरवरी को मनाई जाएगी। आपको बता दें,कुंभ संक्रांति के पावन तिथि पर गंगा स्नान और दान-पुण्य करने की विशेष परंपरा है। ज्योतिष के अनुसार, फाल्गुन मास में जब सूर्यदेव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ संक्रांति मनाई जाती है। सूर्यदेव का यह राशि परिवर्तन समस्त राशियों पर प्रभाव डालता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस वर्ष कुंभ संक्रांति कब है, इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है।
कब है 2025 कुंभ संक्रांति
ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सूर्य 12 फरवरी 2025, बुधवार को रात 10 बजकर 03 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। उदयातिथि के अनुसार, कुंभ संक्रांति 13 फरवरी को मनाई जाएगी।
क्या है कुंभ संक्रांति का पुण्य काल और महा पुण्य काल
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कुंभ संक्रांति पर पुण्य काल दोपहर 12:36 बजे से लेकर शाम 6:10 बजे तक रहेगा। वहीं, महा पुण्य काल दोपहर 4:19 बजे से शाम 6:10 बजे तक होगा। इस प्रकार, पुण्य काल की अवधि 5 घंटे 34 मिनट और महा पुण्य काल की अवधि 2 घंटे 51 मिनट होगी।
कुंभ संक्रांति पर बन रहे हैं कई शुभ योग
कुंभ संक्रांति के अवसर पर सौभाग्य और शोभन योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही अश्लेषा और मघा नक्षत्र का भी संयोग है, साथ ही शिववास योग भी उपस्थित है। इन योगों में सूर्य देव की पूजा करने से साधक को उनकी इच्छित फल की प्राप्ति होगी। इस दिन पितरों की पूजा (तर्पण) भी की जा सकती है।
जानिए कुंभ संक्रांति में कैसे की जाती है पूजा
1. कुंभ संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में जागकर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
2. इसके बाद, उस जल में गंगाजल और तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्पित करें।
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3. अपने घर के मंदिर में दीप जलाएं और सूर्य देव के मंत्रों का जाप करें।
4. सूर्य चालीसा का पाठ करें और किसी जरूरतमंद व्यक्ति या पंडित को दान दें।