

5 नवंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी रमा एकादशी 2026।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
व्रत में फल, दूध, दही और सूखे मेवे खा सकते हैं।
साबूदाना, आलू और शकरकंद से फलाहार तैयार किया जाता है।
एकादशी पर चावल, गेहूं और दालों से परहेज करने की परंपरा है।
Rama Ekadashi Food Rules: 5 नवंबर, गुरुवार को रमा एकादशी रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ और व्रत करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, एकादशी व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत में खानपान की शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत रखने वाले कुछ लोग पूरे दिन निर्जला रहते हैं, जबकि कई लोग फलाहार करके व्रत पूरा करते हैं।
ऐसे में आइए जानते हैं रमा एकादशी क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।
रमा एकादशी के व्रत में फलाहार करने वाले लोग मौसमी फल, दूध, दही और सूखे मेवे खा सकते हैं। इसके अलावा साबूदाना, आलू, शकरकंद और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन भी कई घरों में खाए जाते हैं। व्रत का भोजन तैयार करते समय सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है। हालांकि, खानपान के नियम परिवार और क्षेत्र की मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
एकादशी के दिन पारंपरिक रूप से अनाज और दालों का सेवन नहीं किया जाता है। इसमें चावल, गेहूं, जौ, मक्का और विभिन्न प्रकार की दालें शामिल हैं। इसके अलावा कई परिवारों में प्याज और लहसुन से भी परहेज किया जाता है। मांसाहारी भोजन और नशीले पदार्थों से दूर रहकर सात्विक खानपान अपनाने की परंपरा है।
व्रत के दौरान साबूदाना, कुट्टू का आटा और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन कई परिवारों में खाए जाते हैं। साबूदाने की खिचड़ी, कुट्टू की रोटी और आलू का फलाहारी भोजन लोकप्रिय विकल्प हैं। हालांकि, कुछ धार्मिक परंपराओं में कुट्टू और सामक को लेकर अलग-अलग नियम मिलते हैं। इसलिए अपने घर की परंपरा के अनुसार भोजन करना उचित माना जाता है।
इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करने और तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोगों को अपने खानपान के साथ व्यवहार में भी संयम रखने की सलाह दी जाती है। किसी से कटु वचन न बोलना, विवाद से बचना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस दिन के अच्छे आचरण में शामिल माना जाता है।
रमा एकादशी पर कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार या हल्का भोजन करके पूजा करते हैं। व्रत का तरीका अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा को ध्यान में रखकर चुनना चाहिए। बच्चों, बीमार व्यक्तियों और कमजोरी महसूस करने वालों को कठोर उपवास नहीं करना चाहिए।
इस तरह रमा एकादशी पर सात्विक भोजन, भगवान विष्णु की आराधना और अच्छे आचरण का विशेष महत्व माना जाता है।