Hal Shashthi 2026: आज हलषष्ठी पर संतान के लिए जरूर करें ये उपाय, षष्ठी मय्या की बरसेगी कृपा

Hal Shashthi 2026: हिंदू धर्म में हलषष्ठी का पर्व बड़ा महत्व बताया गया है। यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और रक्षा के लिए रखा जाता है।
Santan Ki Lambi Umar Ke Upay
हलषष्ठी का पर्व (सौ.जैमिनी)
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Santan Ki Lambi Umar Ke Upay : आज 2 सितंबर 2026 को हलषष्ठी का पर्व मनाया जा रहा हैं। हिंदू धर्म में हलषष्ठी का पर्व बड़ा महत्व बताया गया है। यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और रक्षा के लिए रखा जाता है। माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और निरोगी जीवन की कामना से यह निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा-अर्चना करने के साथ-साथ कुछ विशेष उपाय करने से संतान से जुड़ी समस्या दूर होती है और षष्ठी मय्या की कृपा बनी रहती है। हलषष्ठी के दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और निरोगी जीवन के लिए कौन से उपाय कर सकती हैं, यहां जानिए:

हलषष्ठी पर माताएं कौन-सा उपाय करें ?

षष्ठी मय्या की पूजा करें

हलषष्ठी के दिन माताए संतान की सलामती और उन्नति के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। दीवार या जमीन पर छठ माता का चित्र बनाएं। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके हलषष्ठी माता की पूजा करें। पूजा के दौरान संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।

दान-पुण्य करें

इस दिन पूजा-पाठ करने के साथ-साथ किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को मौसमी फल दान करने चाहिए।मौसमी फलों में सेब, नाशपाती, अमरूद आदि का दान कर सकते है। ऐसा करने से अन्न की कमी नहीं होती है और घर की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होने लगती है। इसके अलावा, इस उपाय को करने से संतान के करियर में भी ग्रोथ होती है और धन में वृद्धि के योग बनने लगते हैं।

संतान प्राप्ति के लिए व्रत रखें

हल छठ को केवल संतान की लंबी उम्र से ही नहीं, बल्कि संतान सुख की कामना से भी जोड़कर देखा जाता हैं। धार्मिक मान्यता है कि, जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में बाधाआ रही हो, वे इस दिन श्रद्धा से भगवान बलराम और हर छठ माता की पूजा कर संतान सुख की कामना कर सकते हैं।

हल षष्ठी व्रत की क्या है महिमा?

धर्म शास्त्रों में हल षष्ठी व्रत की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया हैं। हल षष्ठी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि खेती और मातृत्व से जुड़ी लोकपरंपराओं का अभिन्न हिस्सा भी हैं। खेत, हल, मिट्टी और बिना जुताई के उगने वाले अन्न का इस पूजा में शामिल होना इसी ग्रामीण जीवन से इसके पुराने संबंध को दिखाता है।

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