अप्रैल के तीसरे हफ्ते ‘इस’ तिथि को है ‘विकट संकष्टी चतुर्थी’, बन रहे कई शुभ योग, जानिए इस विशेष चतुर्थी की महिमा
विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित एक पावन व्रत है। ऐसे में आइए, विकट संकष्टी चतुर्थी की सही डेट, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-
- Written By: सीमा कुमारी
विकट संकष्टी चतुर्थी (सौ.सोशल मीडिया)
Vikat Sankashti Chaturthi 2025: विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित एक पावन व्रत है। जो हर साल वैशाख महीने में मनाई जाती है। इस साल 16 अप्रैल के दिन विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
यह पर्व वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
ज्योतिष करियर और कारोबार में तरक्की और उन्नति पाने के लिए भगवान गणेश की पूजा करने की सलाह देते हैं। भगवान गणेश की पूजा करने से व्यापार के दाता बुध देव प्रसन्न होते हैं। उनकी कृपा साधक पर बरसती रहती है। इसके लिए साधक श्रद्धा भाव से भगवान गणेश की पूजा करते हैं। ऐसे में आइए, विकट संकष्टी चतुर्थी की सही डेट, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-
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विकट संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 16 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 16 मिनट से वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतु्र्थी तिथि शुरू होगी। वहीं, 17 अप्रैल को दोपहर 03 बजकर 23 मिनट पर वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 16 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। साधक 16 अप्रैल के दिन विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख सकते हैं।
विकट संकष्टी चतुर्थी में बन रहे कई शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो, विकट संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग दिन भर है। इसके साथ ही भद्रावास योग का भी संयोग है।
इस शुभ अवसर पर शिववास योग का भी संयोग है। इस दिन देवों के देव महादेव कैलाश पर विराजमान रहेंगे। इन योग में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथ ही आर्थिक तंगी दूर होगी।
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पंचांग
सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 55 मिनट पर
सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 48 मिनट पर
चंद्रोदय- रात 10 बजे से
चंद्रास्त- सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 10 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 21 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 46 मिनट से 07 बजकर 09 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक
