भगवान श्रीराम ने इस विधि से किया था 'विजया एकादशी' व्रत, जानिए क्या है इस विशेष एकादशी का महत्व

Vijaya Ekadashi Shri Ram Connection: धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार विजया एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने और कथा श्रवण करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सफलता के मार्ग खुलते हैं।
Vijaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi
भगवान विष्णु (सौ.सोशल मीडिया)
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Vijaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi: आज 13 फरवरी को विजया एकादशी व्रत रखा जा रहा है। श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित विजया एकादशी हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में एकादशी के दिन रखा जाता हैं। इस पवित्र अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से की जाती है और पीले रंग की चीज़ों को पहनना और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

ऐसा करने से श्री हरि प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, विजया एकादशी व्रत का संबंध मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम से है।

इस व्रत में भगवान राम ने सीता जी को वापस लाने के लिए और समुद्र पार करने के लिए एकादशी व्रत विधि पूर्वक किया था। ऐसे में आइए यहां पढें एकादशी व्रत कथा

यहां पढें विजया एकादशी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस एकादशी का महत्व पूछा था। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि इस व्रत की महिमा स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को सुनाई थी।

त्रेतायुग में जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया था, तब भगवान श्रीराम अपनी वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुंचे। विशाल समुद्र को पार करना असंभव लग रहा था। तब लक्ष्मण जी ने पास ही एक महान ऋषि के आश्रम में जाकर मार्गदर्शन लेने का सुझाव दिया।

ऋषि ने भगवान श्रीराम को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। तब श्रीराम ने अपनी सेना के साथ पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत किया। व्रत के पुण्य प्रभाव से समुद्र पार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ और अंत में उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त कर माता सीता को मुक्त कराया।

विजया एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत बहुत ही मायने रखता है। वहीं विजया एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। इस व्रत का महत्व इसलिए होता है क्योंकि ये फाल्गुन के महीने में आती है। इस व्रत का संबंध भगवान राम से भी है।

दरअसल भगवान राम ने लंकापति रावण का वध करने से पहले इस व्रत को रखा था। यही वजह है कि इस एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के जरिए हमारे सारे पाप खत्म हो जाते हैं।

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