

Varalakshmi Vrat Mein Kya Kare : धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित वरलक्ष्मी व्रत हर साल सावन महीने के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है। दक्षिण भारत में वरलक्ष्मी व्रत को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
खासतौर पर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में। स्कन्द पुराण और भविष्योत्तर पुराण में वर्णन मिलता है कि, इस व्रत का फल सभी लक्ष्मी व्रतों के समान या उनसे भी श्रेष्ठ माना गया है।
हिंदू लोक मान्यता के अनुसार, विवाहित महिलाएं पति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पूजा की विधि और नियमों को जानना जरूरी हैं। वर्ष 2026 में वरलक्ष्मी व्रत शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
पहली बार वरलक्ष्मी व्रत रखने वाली महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
अगर पहली बार वरलक्ष्मी व्रत रखने जा रहे है तो सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
फिर उसके बाद तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर उस पर आम के पांच पत्ते रखें। कलश पर हल्दी-चंदन लगाकर नारियल रखें और उसे नए वस्त्र या ब्लाउज पीस से सजाएं।
गणेश जी के ध्यान से पूजा शुरू करें। माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उन्हें कुमकुम, हल्दी, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
इस दिन उपवास रखें। पूजा और आरती संपन्न होने के बाद ही फलाहार करें।
दाहिने हाथ में नौ गांठ वाला रक्षा सूत्र (तोरण) बांधा जाता है।
माता वरलक्ष्मी को महालक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि ‘वर’ और ‘लक्ष्मी’ के मेल से बना नाम वरलक्ष्मी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली देवी का प्रतीक है। कहा जाता है कि, इस व्रत को रखने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।