Vaman Jayanti 2026: राजा बलि से 3 पग भूमि मांगने क्यों पहुंचे थे भगवान विष्णु? जानें वामन अवतार की कथा

Vaman Jayanti: वामन जयंती हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान वामन की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
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वामन जयंती(सौ.सोशल मीडिया)
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Bhagwan Vishnu Vaman Avatar: हिंदू धर्म ग्रथों में जगत के पालनहार भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का वर्णन किया गया है। इन्हीं अवतारों में से एक है भगवान वामन का अवतार। वामन जयंती हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि मनाई जाती है।

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने और व्रत रखने की खास परंपरा है। धार्मिक एवं लोक मान्यता के अनुसार, वामन जयंती के दिन श्रद्धा के साथ भगवान वामन की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

साल 2026 में किस दिन है वामन जयंती?

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2026 वामन जयंती 23 सितंबर 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि की शुरुआत 22 सितंबर की रात 9:43 बजे होकर 23 सितंबर की रात 10:50 बजे समाप्त होगा। बताया जा रहा है कि, वामन जयंती पर श्रवण नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है।

श्रवण नक्षत्र 22 सितंबर की सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 23 सितंबर की सुबह 9:09 बजे तक रहेगा। वामन जयंती को कई जगह वामन द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है।

भगवान विष्णु ने क्यों लिया था वामन अवतार?

धर्म शास्त्रों में वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारों में पांचवें अवतार हैं। भगवान विष्णु ने दुष्टों का नाश कर धर्म की स्थापना करने के लिए अवतार धारण लिया था। मत्स्य, कूर्म, वराह और नरसिंह अवतार के बाद भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण किया था।

मान्यता है कि भगवान वामन का जन्म भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को हुआ था। उनके माता-पिता माता अदिति और ऋषि कश्यप माने जाते हैं। भगवान वामन ने अपने इस अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। इसी प्रसंग से जुड़ी कथा वामन जयंती के धार्मिक महत्व को खास बनाती है।

वामन जयंती पर कैसे की जाती है पूजा?

  • वामन जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।

  • इसके बाद भगवान वामन का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है।

  • पूजा स्थान को साफ करके वहां चौकी रखें और उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं।

  • इसके बाद भगवान वामन अथवा भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

  • पूजा में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का स्मरण भी किया जा सकता है।

  • भगवान वामन का आवाहन करते हुए “ॐ नमो भगवते वामनाय नमः” मंत्र का जाप करें।

  • इसके बाद पंचामृत और स्वच्छ जल से भगवान का अभिषेक करें।

  • उन्हें पीले वस्त्र, चंदन, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।

  • इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान को फल या अन्य सात्विक भोग अर्पित करें।

  • वामन अवतार से जुड़ी कथा का पाठ या श्रवण करें और अंत में भगवान वामन की आरती करें।

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