चैत्र नवरात्रि के समापन के बाद ये काम करना बिल्कुल न भूलें, तभी पूर्ण होगी पूजा

Navratri Ke Baad Kya Na Bhoole: चैत्र नवरात्रि के समापन के बाद कुछ विशेष कार्य करना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से ही मां दुर्गा की पूजा पूर्ण मानी जाती है।
Navratri Ke Baad Kya Kare
देवी दुर्गा (सौ.AI)
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Navratri Ke Baad Kya Kare:आज चैत्र नवरात्र का समापन हो रहा है और इस दिन रामनवमी का पर्व भी मनाया जाता है। चैत्र नवरात्र के समापन के बाद दशमी तिथि के दिन कलश विसर्जन भी किया जाएगा। अब कलश विसर्जित करते समय हर किसी के मन में ये सवाल आता है कि आखिर कलश में रखे गए पानी का क्या करना है? ऐसे में आपकी इसी दुविधा को दूर करने के लिए हम आपके लिए लेकर आए हैं ये खास खबर

नवरात्रि में रखे गए कलश के जल का क्या करें?

ज्योतिष एवं धर्म शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में रखे गए कलश के जल को आम या अशोक के पत्तों की मदद से पूरे घर में छिड़काव करें। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर-परिवार की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। इसके अलावा इस जल को घर के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण भी कर सकते है या फिर इसे जल में प्रवाहित कर दें।

कलश में रखे सिक्के और सुपारी का क्या करें?

नवरात्रि के कलश के अंदर डाले गए सिक्के और सुपारी को अपने पर्स में या घर की तिजोरी में रख दें। इससे दरिद्रता दूर होती है। आप चाहें तो सुपारी को प्रवाहित भी कर सकते हैं।

नवरात्रि पूजन में इस्तेमाल हुए पत्तों और फूलों का क्या करें?

पूजा में इस्तेमाल हुए पत्तों और फलों को गमले की मिट्टी में दबा दें या जल में विसर्जित कर दें। साथ ही कलश के गले में बंधा कलावा परिवार के सदस्य अपनी कलाई पर बांध सकते हैं। यह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

नवरात्रि पर्व का आध्यात्मिक महत्व

  • शक्ति की आराधना: यह पर्व देवी दुर्गा की पूजा के माध्यम से नारी शक्ति और दिव्य ऊर्जा का उत्सव है, जो भक्तों को आत्मविश्वास और शक्ति प्रदान करता है।
  • आध्यात्मिक शुद्धि: नौ दिनों तक उपवास, ध्यान और साधना से मन-मस्तिष्क केंद्रित होता है और आत्मिक शुद्धि होती है, जिसे एक नए जन्म की तरह माना जाता है।
  • बुराई पर अच्छाई की विजय: यह महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय का प्रतीक है, जो जीवन में धर्म और सच्चाई की स्थापना का संदेश देता है।
  • वैज्ञानिक व आयुर्वेदिक महत्व: यह त्योहार ऋतु परिवर्तन के समय आता है, जब उपवास से शरीर का विषैला पदार्थ बाहर निकलता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है।
  • सांस्कृतिक एकता: यह पर्व समाज में प्रेम, भाईचारे और सामूहिकता को बढ़ावा देता है।
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