महानवमी पर जानिए सभी अष्टसिद्धियों के नाम, और जानिए किसकी पुत्री से हनुमानजी को करना पड़ा था विवाह

Maa Siddhidatri Ashta Siddhis: महानवमी पर अष्टसिद्धियों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि हनुमानजी को सूर्यदेव की पुत्री से विवाह करना पड़ा था, जिससे जुड़ी कथा बेहद रोचक है।
What Are The Eight Siddhis:
मां सिद्धिदात्री (सौ. Gemini)
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What Are The Eight Siddhis: आज चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के बाद पूरे नौ दिनों का महापर्व का समापन हो जाएगा। धर्म शास्त्रों में वर्णित है कि जो साधक श्रद्धा और पूर्ण आस्था के साथ मां सिद्धिदात्री की उपासना करता है, उसके जीवन से भय, बाधाएं और नकारात्मकता दूर होने लगती है।

धार्मिक परंपराओं में मां सिद्धिदात्री की पूजा को सिर्फ कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वरीय ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम माना गया है। चैत्र नवरात्रि के शुभ मौके पर आइए जानते हैं माता सिद्धिदात्री की कौन सी हैं ये 8 सिद्धियां और इन सिद्धियों का क्या है अर्थ और महत्व?

माता सिद्धिदात्री की कौन सी हैं ये 8 सिद्धियां

मां सिद्धिदात्री की आठ सिद्धियां- मां सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की आध्यात्मिक और लौकिक सिद्धियों की दात्री माना गया है, इसलिए साधक पूरे श्रद्धा भाव से उनकी आराधना करते है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, वे आठ प्रमुख सिद्धियां प्रदान करती हैं:

माता सिद्धिदात्री की 8 सिद्धियां के नाम का अर्थ और महत्व

  1. अणिमा : अपने शरीर को अत्यंत सूक्ष्म या छोटा बनाने की शक्ति।
  2. महिमा : अपने शरीर को बहुत विशाल या बड़ा रूप देने की क्षमता।
  3. गरिमा : शरीर को किसी पर्वत की भांति अत्यंत भारी बना लेना।
  4. लघिमा : स्वयं को रुई की तरह हल्का कर लेना।
  5. प्राप्ति : कहीं भी पहुंच जाने की शक्ति, इच्छित वस्तु को प्राप्त करना।
  6. प्राकाम्य : मनचाही वस्तु या कामना को सिद्ध करने की शक्ति।
  7. ईशित्व : ईश्वरत्व की प्राप्ति, अर्थात सभी सांसारिक वस्तुओं पर प्रभुत्व।
  8. वशित्व : सबको अपने वश में करने की शक्ति।

धार्मिक ग्रंथों, विशेष रूप से मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है कि मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को आठ प्रमुख सिद्धियां प्रदान करती हैं। इन सिद्धियों को प्राप्त करने वाला साधक जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि नवरात्र के अंतिम दिन देवी के इस स्वरूप की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।

सूर्यदेव से मिली थीं हनुमान जी को अष्ट सिद्धि

  • शिक्षा और वरदान: सूर्यदेव ने न केवल हनुमान जी को ज्ञान दिया, बल्कि अपना सौवां भाग (तेज) भी उन्हें प्रदान किया और भविष्य में सभी शास्त्र पढ़ाने का दायित्व भी लिया।
  • अष्ट सिद्धि और नव निधि: हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों का वरदान मुख्य रूप से माता सीता से प्राप्त हुआ था (जैसा कि हनुमान चालीसा में कहा गया है - 'अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, लेकिन इन शक्तियों की क्षमता सूर्यदेव के दिव्य तेज से पुष्ट हुई थी।
  • विवाह की शर्त: सूर्यदेव के अनुसार, वे सभी सिद्धियां केवल एक गृहस्थ को दे सकते थे। इसलिए, हनुमान जी को सूर्यदेव की पुत्री सुवर्चला से विवाह करना पड़ा, ताकि वे पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकें।
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