मनोरंजन में खोकर जिंदगी मत बिगाड़ो, राधा-राधा जप लो बदलेगी किस्मत

Premanand Ji Maharaj: इंसान मनोरंजन, नाम और शोहरत के पीछे भागते-भागते असली मकसद भूल गया है। संत श्री प्रेमानंद जी महाराज का संदेश यही है कि अगर जीवन में सच्चा सुख और शांति चाहिए तो राधा-राधा कहिए।
squander your life by losing yourself in entertainment; chant Radha Radha
Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Published on
Updated on

Positive Life Change: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान मनोरंजन, नाम और शोहरत के पीछे भागते-भागते असली मकसद भूल गया है। संत श्री प्रेमानंद जी महाराज का संदेश यही है कि अगर जीवन में सच्चा सुख और शांति चाहिए, तो अपनी आदतों को बदलना जरूरी है। क्योंकि "मृत्यु तुम्हारे अत्यंत निकट है और यह संसार केवल माया का खेल है।"

मनोरंजन और नाम के मोह से बचें

आज का इंसान सोशल मीडिया, वीडियो और दिखावे में उलझकर अपनी पूरी जिंदगी बिता देता है। लेकिन अंत समय में यह सब किसी काम नहीं आता। "तुम चाहते हो कि तुम्हारा नाम हो, तुम्हारी कीर्ति चारों दिशाओं में फैले, लेकिन जब यह शरीर ही मिट्टी में मिल जाएगा, तो उस नाम का क्या अस्तित्व रहेगा?" अगर आचरण सही नहीं है, तो दुनिया की तारीफ भी बेकार है। इतिहास गवाह है कर्ण, बाणासुर जैसे महाबली भी आज सिर्फ कहानी बनकर रह गए।

असली ताकत है भगवन्नाम में

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार असली पुरुषार्थ शरीर बनाने या दिखावे में नहीं, बल्कि भगवान के नाम के जप में है। "असली पुरुषार्थ भगवन्नाम जप में है।" यही वह शक्ति है जो इंसान को अंदर से मजबूत बनाती है और जीवन के हर संकट से बाहर निकालती है।

सहनशीलता: सफलता की असली कुंजी

अध्यात्म की राह पर आगे बढ़ने के लिए एक गुण सबसे जरूरी है सहनशीलता। "यदि तुम्हें कोई चोर कहे, पीटे या नीच कहे, तो भी मौन रहकर सह लो।" जो व्यक्ति दुख और अपमान को शांत मन से सह लेता है, वही सच्चे अर्थों में भगवान को प्राप्त कर सकता है।

राधा-राधा और गोविंद जप से मिलेगा सुकून

संसार के दुखों से बचने का सबसे सरल उपाय है भगवान का नाम लेना। "गोविंद-गोविंद" और "राधा-राधा" का जप पापों को नष्ट कर देता है। कुछ आसान उपाय जो जीवन बदल सकते हैं:

  • प्रभु की चार परिक्रमा करने से नकारात्मकता दूर होती है
  • तुलसी प्रसाद का स्पर्श भी शुभ फल देता है
  • साष्टांग प्रणाम से जीवन के बंधन कम होते हैं

सत्संग में कैसे बनें सही श्रोता?

सिर्फ सत्संग में बैठना काफी नहीं, सही तरीके से सुनना जरूरी है।

  • चातक श्रोता: जो पूरी एकाग्रता से सुनता है
  • हंस श्रोता: जो सार्थक बातों को अपनाता है
  • मीन श्रोता: जो सत्संग के बिना रह नहीं सकता

वहीं, नकारात्मक सोच वाले श्रोता बनने से बचना चाहिए।

जीवन बदलना है तो आज से शुरुआत करें

संतों का संदेश साफ है अहंकार छोड़कर भगवान के नाम में मन लगाएं। "जो भगवान की चर्चा को बेचता नहीं है, भगवान स्वयं उसका भरण-पोषण करते हैं।" अगर आप अपनी आदतें बदल लेते हैं, तो यकीन मानिए आपकी जिंदगी खुद बदल जाएगी।

Navbharat Live
navbharatlive.com