भोलेनाथ से नहीं, नंदी के कान में कहें अपनी मनोकामनाएं, पहुंच जाएंगी बातें भगवान शिव के पास, लेकिन इसके भी हैं नियम, जानिए
भगवान भोलेनाथ की सवारी नंदी भक्तों की हर मुराद को महादेव तक पहुंचाते है। लेकिन नंदी के कान में मनोकामना नियम के साथ बोलना चाहिए। शास्त्रों में नंदी महाराज की पूजा का विशेष महत्व है।
- Written By: सीमा कुमारी
ऐसे कहें नंदी से अपनी मनोकामना (सौ.सोशल मीडिया)
Mahashivratri 2025: आज पूरे देशभर में महाशिवरात्रि का महापर्व मनाई जा रही है। हर तरफ भोले की गूंज सुनाई दे रही है। देश के सभी शिवालयों का नजारा बहुत ही दिव्य और भव्य देखने को मिल रही है। श्रद्धालुओं में खास उत्साह और भक्ति में डूबे नजर आ रहे हैं। सुबह से लोग शिव मंदिरों में भगवान के जलाभिषेक के लिए लाइन में लगे हुए हैं। देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों को काफी भव्य तरीके से सजाया गया है।
काशी और उज्जैन में से विशेष पूजा-अर्चना की गई है। भोलेनाथ को दूल्हे की तरह सजाया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था। साथ ही भगवान शिव इसी दिन निराकार रूप से साकार रूप में प्रकट भी हुए थे।
कहा जाता है कि भगवान शिव शंकर की विधिवत पूजा के बाद नंदी गाय की भी पूजा करनी चाहिए। साथ ही पूजा के दौरान उनके कानों में अपनी मनोकामना भी कहनी चाहिए।
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हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, नंदी के कानों में मनोकामना कहने से पहले ओम कहना अनिवार्य होता है, इससे नंदी आपकी बात ध्यानपूर्वक सुनते हैं और फिर भगवान शिव को आपकी मनोकामना बताते हैं। ऐसे में आपके भी मन में कई सवाल उठे हैं कि आखिर नंदी के कान में क्यों कहते हैं। तो आइए जानते हैं इस बारे में –
क्या है वह पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव ने ही नंदी को यह वरदान दिया था, कि जो कोई तुम्हारे कान में आकर अपनी मनोकामना बोलेगा, उसकी हर इच्छा मुझ तक पहुंचेगी और वह पूरी होगी। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा महादेव तक पहुंचानी है, तो वह नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना कहता है।
एक अलग कथा के मुताबिक, नंदी भगवान शिव के विश्वासपात्र और सबसे करीबी सेवक है। एक बार, एक ऋषि ने नंदी से कहा कि वह भगवान शिव के समीप रहने के कारण काफी भाग्यशाली है। नंदी ने ऋषि से कहा कि वह भगवान शिव की ही कृपा से उनके समीप रहते हैं। इस पर ऋषि ने नंदी से पूछा कि वह भगवान शिव को अपनी मनोकामनाएं कैसे बताते हैं तो नंदी ने कहा कि वह भगवान शिव के कान में अपनी मनोकामनाएं नहीं बता सकता, क्योंकि वह उनके समीप रहते हैं तो उनकी हर बात सिर्फ सुनते हैं।
इस पर ऋषि ने नंदी से कहा कि वह अपनी मनोकामनाएं भगवान शिव के पास रहने वाले नंदी के कान में बता सकता हैं। इससे भगवान शिव तक वह मनोकामना पहुंच जाएगी। इस पर नंदी ने हामी भर दी तब से अपनी मनोकामनाएं नंदी के कान में कही जाती हैं।
ऐसे कहें नंदी से अपनी मनोकामना
अगर किसी को नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहनी है तो उसे सबसे पहले विधि-विधान से उनका पूजन करना चाहिए। उनके पास दीपक जलाना चाहिए और उन्हें भोग लगाना चाहिए।
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इसके बाद ओम शब्द बोलकर अपनी मनोकामना नंदी जी के कान में कहनी चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि यदि आप नंदी के बाएं कान में आप अपनी मनोकामना कहते हैं, तो वह जल्द महादेव तक पहुंचती है और मनोकामना पूरी होती है।
