Shardiya Navratri 2026: कैसे हुआ महिषासुर का अंत? जानें मां दुर्गा और असुर के बीच नौ दिनों तक चले युद्ध की कथा

Navratri Special: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, देवी ने नौ दिनों तक युद्ध करने के बाद महिषासुर का वध किया था। जानिए कथा और विजयादशमी का महत्व।
Mahishasur Vadh Story
मां दुर्गा महिषासुर मर्दन(सौ. सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • महिषासुर का वध कर मां दुर्गा ने की धर्म की स्थापना

  • नौ दिनों तक चला था मां दुर्गा और महिषासुर का युद्ध

  • विजयादशमी पर मनाई जाती है बुराई पर अच्छाई की जीत

Mahishasur Vadh Story Durga Puja: पूरे देश भर में जल्द ही शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होने वाला है। जहां 10 अक्टूबर को महालया है, तो वहीं उसके अगले दिन यानी 11 अक्टूबर से नवरात्र महापर्व का शुभारंभ होने वाला है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक शक्तिशाली असुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है।

कौन था महिषासुर?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस का जन्म रंभा और भैंस (महिषी) के मिलन से हुआ था, इसलिए वह आधा मनुष्य और आधा भैंस था। महिषासुर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का महान भक्त था और ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दिया था कि कोई भी देवता या दानव उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता।

स्वर्ग में मचाया उत्पात

महिषासुर बाद में स्वर्ग लोक के देवताओं को परेशान करने लगा और पृथ्वी पर भी उत्पात मचाने लगा। उसने स्वर्ग पर एक बार अचानक आक्रमण कर दिया और इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया तथा सभी देवताओं को वहां से खदेड़ दिया। देवगण परेशान होकर त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुंचे। सारे देवताओं ने फिर से मिलकर उसे परास्त करने के लिए युद्ध किया, परंतु वे फिर हार गए।

देवताओं ने किया था मां दुर्गा का आह्वान

कोई अन्य उपाय न देखकर देवताओं ने महिषासुर के संहार के लिए देवी दुर्गा का आह्वान किया, जिन्हें आदिशक्ति और माता पार्वती के नाम से भी जाना जाता है। वह शिव के त्रिशूल, विष्णु के चक्र, हिमालय के सिंह और वायु के धनुष-बाण से सुसज्जित थीं। सभी देवताओं की संयुक्त शक्ति और क्रोध से परिपूर्ण देवी का रूप इतना भयंकर था कि उनके दर्शन मात्र से ही राक्षस भयभीत हो जाते थे।

9 दिनों तक चला था युद्ध

मां दुर्गा ने महिषासुर पर आक्रमण कर लगातार नौ दिनों तक घोर युद्ध किया। पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर ने भी अत्यंत वीरतापूर्वक युद्ध का सामना किया। इस दौरान उसने मायावी रूप बदलते हुए भैंस, सिंह, मानव, हाथी और अंत में पुनः भैंस का रूप धारण किया। युद्ध के दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर को अपने पैरों तले रौंदते हुए त्रिशूल से उस पर घातक प्रहार किया। असहाय होकर महिषासुर ने अपनी रक्षा के लिए पुनः मनुष्य रूप में आने का प्रयास किया, लेकिन वह केवल कमर तक ही प्रकट हो सका। इसी क्षण देवी ने उसका वध कर दिया।

इसीलिए होती है दुर्गा पूजा

इस महान विजय के उपलक्ष्य में हिंदू समाज दस दिवसीय दुर्गा पूजा का महापर्व मनाता है। इसके दसवें दिन को विजयादशमी के रूप में जाना जाता है, जो अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

महिषासुर अपनी शक्ति और वरदान के नशे में चूर था, लेकिन उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना। यह संदेश मिलता है कि अत्यधिक अहंकार का पतन तय है। महिषासुर हमारे भीतर की इच्छाओं की कभी न खत्म होने वाली शृंखला का प्रतीक है। एक इच्छा पूरी होने पर दूसरी उत्पन्न हो जाती है और उसकी जगह ले लेती है। इन पर नियंत्रण ही वास्तविक विजय है।

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