

Sawan Somvar Nag Pancham : सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रहे है। यह दुर्लभ महासंयोग लगभग 23 साल बाद आया है, जिससे भगवान शिव और नाग देवता दोनों की एक साथ कृपा पाने का अत्यंत उत्तम अवसर बन रहा है।
बताया जा रहा है कि शिवभक्तों के लिए महादेव और नाग देवता दोनों का आशीर्वाद प्राप्त करने का यह विशेष अवसर माना जाता है। आइए जानते है जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है, राहु-केतु की महादशा चल रही है या जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए इस दिन किए गए विशेष धार्मिक उपाय लाभकारी साबित हो सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:28 से 06:07 बजे तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 01:26 से 02:23 बजे तक
अमृत काल शाम 06:46 से रात 08:27 बजे तक
ज्योतिषयों के अनुसार, कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुभ माना जाता है। कहते है इस दिन कम से कम 108 बार महामृत्युंजय मंत्र या नाग गायत्री मंत्र का जाप करना बहुत ही शुभ होता है।
इस दिन चांदी या तांबे से निर्मित नाग-नागिन के जोड़े का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद इसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें या मंदिर में शिवलिंग पर अर्पित करें।
शिवलिंग पर तांबे या पीतल के लोटे से जल चढ़ाते समय उसमें थोड़े काले तिल मिला लें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से राहु और केतु के अशुभ प्रभावों को शांत करने में मदद मिलती है।
हिंदू धर्म में नाग देवता को पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में नाग का विराजमान होना भी नाग पूजा और शिव आराधना के संबंध को दर्शाता है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा इसी धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है।
वहीं सावन के सोमवार को भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से शिवलिंग पर जल चढ़ाने, बेलपत्र अर्पित करने और भगवान शिव का ध्यान करने से मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है।