सफला एकादशी 2025 15 दिसंबर को, भगवान विष्णु की कृपा से सफलता पाने के लिए जानें कैसे करें व्रत
Saphala Ekadashi 2025 Tithi: सफला एकादशी 2025 का व्रत 15 दिसंबर को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान और उपवास रखने से जीवन में सफलता, समृद्धि मिलती है। जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
- Written By: सीमा कुमारी
सफला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Saphala Ekadashi Kab Hai 2025: 15 दिसंबर 2025, सोमवार को सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। एकादशी व्रत हिन्दू धर्म में जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित एक पावन व्रत है, जो हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में रखा जाता है, जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि, पाप-नाश और मोक्ष की प्राप्ति है। आपको जानकारी के लिए बता दें, पंचांग के अनुसार,इस बार दिसंबर 2025 में तीन एकादशी व्रत रखे जाने हैं। इसमें पहली एकादशी मोक्षदा एकादशी थी, जो 1 दिसंबर को थी, जबकि दूसरी एकादशी सफला एकादशी है।
सफला एकादशी का शुभ मुहूर्त और पूजा समय
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, एकादशी तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर 2025 को शाम 6:49 बजे से होगी और यह तिथि 15 दिसंबर 2025 को रात 9:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। ‘सफला’ नाम से ही स्पष्ट है कि यह व्रत सफलता प्रदान करने वाला है।
सफला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में सफला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और उपवास रखने से जीवन में सफलता, समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के रुके हुए काम पूरे होते हैं और आर्थिक व मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। इसी कारण इसे “सफला” एकादशी कहा जाता है, यानी ऐसा व्रत जो कार्यों को सफल बनाता है।
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व्रती इस दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करते हैं। इसके बाद धूप-दीप, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित कर विष्णु मंत्रों का जाप किया जाता है। दिनभर उपवास रखकर भगवान का स्मरण करना और एकादशी व्रत कथा का श्रवण करना शुभ माना जाता है। कई भक्त निर्जल व्रत भी रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार के साथ व्रत करते हैं।
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धार्मिक शास्त्रों के अनुसार सफला एकादशी का व्रत करने से न केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। यह व्रत मन को शुद्ध करने और आत्म-संयम सीखने का संदेश देता है। व्रत का पारण द्वादशी तिथि को शुभ समय में किया जाता है, जिसमें ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है।
कुल मिलाकर, सफला एकादशी 2025 भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन को सफल दिशा देने का एक उत्तम अवसर मानी जा रही है।
