(सौजन्य सोशल मीडिया)
भगवान शिव जी का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है। देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिव भक्त हर वो उपाय करते हैं, जिनका वर्णन शास्त्रों में बताया गया है। उनमें से एक सबसे सरल एवं सुगम उपाय है शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का। बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। उसके बिना भगवान भोलेनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है।
सावन, शिवरात्रि, प्रदोष, सोमवार आदि के व्रतों में तो बेलपत्र चढ़ाना अनिवार्य माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों और पंडितों के अनुसार, शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ को शीतलता मिलती है। आइए जानें क्या कहते हैं पंडित, बेलपत्र चढ़ाने का क्या है सही तरीका….
पंडितों के अनुसार, यदि आप भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते हैं, तो उसमें 3 पत्तियां होनी जरूरी हैं। अन्यथा, वह अपूर्ण माना जाएगा। बेलपत्र का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसकी पत्तियां कटी-फटी न हों और उस पर किसी प्रकार के दाग-धब्बे न हों। बेलपत्र ताजा होना चाहिए, वह मुरझाया न हो।
भोले बाबा को सावन के महीने में किसी भी तरह की पूजा में हमेशा उल्टा बेलपत्र यानी चिकनी सतह की तरफ वाला वाला भाग स्पर्श कराते हुए ही बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। ध्यान रखें कि बेलपत्र को हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं मध्य वाली पत्ती को पकड़कर महादेव को अर्पित करें।
यदि आप शिव मंदिर गए हैं और आपके पास बेल-पत्र नहीं है तो परेशान न हों। शिवलिंग पर पहले से अर्पित बेलपत्र को उठाकर जल से धो लें। फिर उसे शिवजी को अर्पित कर दें। एक बार अर्पित किए गए बेलपत्र को दोबारा भी उपयोग में ला सकते हैं। वह जूठा नहीं माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, बेलपत्र को कुछ विशेष तिथियों में तोड़ना वर्जित माना जाता है। जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और खासकर सोमवार के दिन बेलपत्र को भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पहले ही बेल-पत्र तोड़कर रखा जाता है।
लेखिका- सीमा कुमारी