

Raksha Bandhan 2026 Muhurat: सावन की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है, जब बहनें अपने भाई की दाहिने कलाई पर राखी बांधकर और माथे पर तिलक लगाकर लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है।
भाई के अलावा इन चीजों को भी राखी बांधी जा सकती है। आइए जानते हैं राखी की इस परंपरा के बारे में।
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा तो सभी जानते हैं, लेकिन कई धार्मिक परंपराओं में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को भी रक्षासूत्र बांधा जाता है। इसे ईश्वर के प्रति श्रद्धा और रक्षा के भाव से किया जाता है।
कुछ परिवारों में रक्षाबंधन के दिन घर के पूजा स्थल में स्थापित देवी-देवताओं को भी राखी बांधी जाती है। इससे परिवार पर ईश्वर की कृपा और सुरक्षा बनी रहती है। जैसे हम अपने भाई की रक्षा के लिए राखी बांधते हैं, वैसे ही भगवान परिवार की रक्षा करें।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में गाय को पूजनीय माना जाता है। इसी वजह से कुछ स्थानों पर रक्षाबंधन के अवसर पर गाय को भी राखी बांधकर उसकी पूजा की जाती है। इसके पीछे श्रद्धा और संरक्षण की भावना जुड़ी होती है।
प्रकृति के प्रति सम्मान जताने के लिए पेड़ को रक्षासूत्र बांधने की परंपरा है। खासतौर पर तुलसी या पूजनीय पेड़-पौधों के प्रति इस तरह की धार्मिक आस्था जुड़ी होती है।
आज के समय में रक्षाबंधन की परंपरा का एक आधुनिक रूप भी देखने को मिलता है। कुछ लोग अपने वाहन को राखी बांधते हैं और उसके सुरक्षित सफर की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता पर विश्वास करने वाले लोग इसे अपने जीवन में सहायक के प्रति सम्मान से जोड़ते हैं।
लैपटॉप, औजार या दूसरे कामकाजी उपकरण आज हमारी रोजी-रोटी का हिस्सा हैं। इसलिए कुछ लोग रक्षाबंधन पर इन्हें भी रक्षासूत्र बांधते है और सफल काम की कामना करते हैं।
रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी और भद्रा का समय मुख्य राखी बांधने के समय से पहले समाप्त हो जाएगी।