

Jyeshtha Pradosh Vrat Kab Hai: हिन्दू धर्म में शिव आराधना का विशेष महत्व है। खासतौर पर, हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला प्रदोष व्रत हिन्दू श्रद्धालुओं में बड़ा महत्व रखता हैं। इस बार ज्येष्ठ महीने का पहला प्रदोष व्रत 14 मई दिन गुरुवार को रखा जा रहा हैं। शिवभक्तों को हर महीने आने वाले प्रदोष व्रत का बेसब्री से इंतजार होता है। लोग दिनभर उपवास रखकर शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से इस व्रत को करने से सारे कष्ट दूर होते हैं। प्रदोष व्रत का नाम उस दिन के नाम पर होता है, जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है। जैसे पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को होगा। इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है।
प्रदोष व्रत हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। साथ ही व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 मई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 15 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा. ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए ज्येष्ठ महीने का पहला प्रदोष व्रत 14 मई दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 14 मई को प्रदोष काल शाम 7 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इस शुभ समय में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।