Padmini Ekadashi Vrat : पद्मिनी एकादशी व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का सही समय
Padmini Ekadashi Vrat Vidhi In Hindi:पद्मिनी एकादशी का व्रत आज श्रद्धा और भक्ति के साथ रखा जा रहा है। इस खास अवसर पर भक्त भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी (सौ.जैमिनी)
Padmini Ekadashi Kab Hai: आज 27 मई को अधिकमास की पहली एकादशी यानी पद्मिनी एकादशी है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, भगवान विष्णु को समर्पित पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने यज्ञों के समान पुण्य फल मिलता है। खासतौर पर, पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से। चूंकि, यह एकादशी तीन साल में एक बार आती है।
पद्मिनी एकादशी व्रत का महत्व
धार्मिक ग्रथों में पद्मिनी एकादशी व्रत का बड़ा महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कई बाधाएं दूर होती है। ऐसे में सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय जानना बेहद जरूरी हो जाता है।
कब है पद्मिनी एकादशी 2026?
पंचांग के अनुसार, इस साल पद्मिनी एकादशी का व्रत आज 27 मई, बुधवार को रखा जाएगा। हालांकि एकादशी तिथि की शुरुआत 26 मई सुबह 5 बजकर 10 मिनट से हो चुकी है, लेकिन उदया तिथि के अनुसार व्रत 27 मई को मान्य रहेगा।
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होती है, उसी दिन व्रत रखा जाता है। इस बार सूर्योदय के समय एकादशी तिथि 27 मई को पड़ रही है, इसलिए यही व्रत का मुख्य दिन माना जाएगा।
एकादशी तिथि और पारण का शुभ समय
- एकादशी तिथि प्रारंभ – 26 मई 2026, सुबह 5:10 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त – 27 मई 2026, सुबह 6:21 बजे
- व्रत पारण – 28 मई 2026, सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक
कैसे करें पद्मिनी एकादशी पूजा?
- सुबह जल्दी उठकर गंगा जल या शुद्ध जल से स्नान करें।
- स्नान के बाद एक चौकी को शुद्ध जल से साफ करें।
- घर के मंदिर में चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराएं।
- इसके बाद फूल, तुलसी की माला और पीले वस्त्र अर्पित करें।
- देसी घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
- पूजा में मिष्ठान, फल, तुलसी दल और पंचामृत का भोग लगाएं।
- पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
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अधिकमास में क्यों बढ़ जाता है पद्मिनी एकादशी का महत्व?
हिंदू पंचांग में अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह लगभग 32 महीनों के अंतराल में आता है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यही कारण है कि इस पावन महीने में आने वाली पद्मिनी एकादशी का महत्व सामान्य एकादशी की तुलना में अधिक माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजा करने से व्यक्ति को यज्ञ और कठिन तपस्या के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला माना जाता है।
विशेष रूप से संतान प्राप्ति, वैवाहिक सुख और पारिवारिक खुशहाली की कामना करने वाले श्रद्धालु इस व्रत को बड़ी आस्था के साथ रखते हैं।
