तुलसी विवाह पूजन की सामग्री लिस्ट नोट कीजिए, ‘इसके’ बिना भगवान विष्णु का भोग है अधूरा
Tulsi Vivah 2025:यदि आप भी तुलसी विवाह अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं, तो पूजा के लिए ये आवश्यक सामग्री शामिल करना न भूलें, ताकि आपके विवाह अनुष्ठान में किसी तरह की बाधा न आए। आइए जानते हैं इस बारे में-
- Written By: सीमा कुमारी
तुलसी विवाह में जरूर शामिल करें ये चीजें (सौ.सोशल मीडिया)
Tulsi Vivah Samagri List 2025: सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत ही पवित्र माना गया है। लोगों का ऐसा विश्वास है कि तुलसी में मां लक्ष्मी का वास होता है। शास्त्रों के अनुसार, हर साल कार्तिक मास की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु और माता तुलसी का विवाह किया जाता है, जिसे तुलसी विवाह कहा जाता है।
आपको बता दें, तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के दूसरे दिन मनाई जाती है। यदि आप भी तुलसी विवाह अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं, तो पूजा के लिए ये आवश्यक सामग्री शामिल करना न भूलें, ताकि आपके विवाह अनुष्ठान में किसी तरह की बाधा न आए। आइए जानते हैं इस बारे में-
ये है तुलसी विवाह की पूरी सामग्री की लिस्ट
- तुलसी का पौधा, शालीग्राम जी और भगवान विष्णु की मूर्ति या प्रतिमा
- लाल रंग का कोरा कपड़ा, कलश, पूजा की चौकी
- सुहाग की सामग्री जैसे -बिछुए, सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, चुनरी, काजल और सिंदूर आदि
- मौसमी फल व सब्जियां जैसे मूली, सिंघाड़ा, आंवला, बेर और अमरुद आदि
- केले के पत्ते, हल्दी की गांठ
- नारियल, कपूर, धूप, दीप, चंदन
किस तरह करें तुलसी विवाह पूजन की तैयारियां
सबसे पहले तुलसी विवाह अनुष्ठान के लिए केले के पत्तों और गन्ने से मंडप तैयार करें। रंगोली बनाकर पूजा स्थल को सजाएं और इस स्थान पर तुलसी का पौधा, शालीग्राम व भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और विवाह अनुष्ठान शुरू करें।
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पूजा में मां तुलसी को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। इसके बाद पूजा में गन्ना, केला, सिंघाड़ा और मूली आदि अर्पित करें। घी के 11 दीपक जलाएं और भजन करें। अंत में आरती करके सभी में प्रसाद बांटें।
तुलसी विवाह के दिन ये काम करना न भूलें
ज्योतिषयों के अनुसार, तुलसी विवाह के दिन भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें, क्योंकि इसके बिना प्रभु श्रीहरि का भोग अधूरा माना गया है। ऐसा करने से साधक को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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तुलसी विवाह के दिन सूर्यास्त के बाद तुलसी के समक्ष घी का दीपक भी जरूर जलाएं और 7 या 11 बार तुलसी की परिक्रमा करें। ऐसा करने से साधक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का माहौल बना रहता है।
