नवरात्रि के चौथे दिन ऐसे करें मां कूष्मांडा की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

Navratri Day 4 Benefits : नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली का वास होता है। जानिए सरल पूजन विधि और शुभ मुहूर्त।
Maa Kushmanda Puja Vidhi:
मां कूष्मांडा(सौ. AI)
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Maa Kushmanda Puja Vidhi: पूरे देशभर में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।आज 22 मार्च को चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाएगी।

धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, मां दुर्गा के चौथे रूप मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है, साथ ही सभी दुखों और बाधाओं का नाश होता है। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती, जिससे आप उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र में चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर मां कूष्मांडा की आराधना के लिए सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है। 22 मार्च 2026 को दृक पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:53 तक रहेगा।

इस शुभ मुहूर्त में की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाती है। सही समय पर मां का ध्यान करने से बुद्धि का विकास होता है और भविष्य की चिंताओं से राहत मिलती है।

इस पावन समय में की गई साधना न केवल शारीरिक कष्टों को दूर करती है, बल्कि परिवार में प्रेम, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।

कैसे करें मां कूष्मांडा की पूजा

  • मां कूष्मांडा की पूजा सरल भाव और श्रद्धा से करने पर विशेष फल मिलता है। पूजन विधि इस प्रकार है-
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या नारंगी रंग के वस्त्र धारण करें, जो उत्साह और ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं।
  • मां की प्रतिमा के सामने घी का अखंड दीपक जलाएं और सृष्टि के लिए भगवान का धन्यवाद करें।
  • मां को लाल फूल और हरी इलायची अर्पित करें, क्योंकि उन्हें सुगंधित और सरल चीजें प्रिय होती हैं।
  • भोग के रूप में मालपुआ या दही-हलवा चढ़ाएं, जिससे घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य बना रहता है।
  • यदि संभव हो तो कुम्हड़ा (पेठा) अर्पित करें, इससे जीवन के कष्ट दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।

मां कुष्मांडा की आरती

कुष्मांडा जय जग सुखदानी।

मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।

शाकंबरी मां भोली भाली॥ कुष्मांडा जय…

लाखों नाम निराले तेरे।

भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।

स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥ कुष्मांडा जय…

सबकी सुनती हो जगदम्बे।

सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।

पूर्ण कर दो मेरी आशा॥ कुष्मांडा जय…

मां के मन में ममता भारी।

क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।

दूर करो मां संकट मेरा॥ कुष्मांडा जय…

मेरे कारज पूरे कर दो।

मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।

भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥ कुष्मांडा जय…

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