Nag Panchami 2026: कब है नाग पंचमी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नाग देवता की आराधना का महत्व
Nag Panchami 2026 Puja: नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो नाग देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। जानिए नाग पंचमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व।
- Written By: सीमा कुमारी
नाग देवता (सौ.सोशल मीडिया)
Nag Panchami Worship Benefits: 30 जुलाई 2026 से पवित्र श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। हिंदू धर्म में श्रावण को भगवान शिव की उपासना का सबसे शुभ समय माना जाता है। इसी पावन महीने में भगवान शिव के प्रिय नाग देवता की पूजा का विशेष पर्व नाग पंचमी मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। श्रद्धालु इस दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
क्यों खास है नाग पंचमी का पर्व?
सनातन धर्म में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, नाग पंचमी की कथा सुनते हैं और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।
कई स्थानों पर लोग मिट्टी से नाग देवता की प्रतिमा बनाते हैं या घर की दीवारों पर नाग का चित्र बनाकर उनकी पूजा करते हैं। पूजा के दौरान फूल, अक्षत, हल्दी, चंदन और दूध अर्पित किया जाता है।
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नाग पंचमी 17 अगस्त 2026, सोमवार पूजा का शुभ मुहूर्त:
सुबह 6:00 बजे से 8:10 बजे तक
पूजा मुहूर्त की अवधि:
2 घंटे 10 मिनट
पंचमी तिथि प्रारंभ:
16 अगस्त 2026, शाम 4:55 बजे
पंचमी तिथि समाप्त:
17 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे
क्या है नाग पंचमी का धार्मिक महत्व?
धार्मिक ग्रंथों में नागों को प्रकृति के रक्षक और भगवान शिव के आभूषण के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से भय, रोग और संकटों से रक्षा होती है।गरुड़ पुराण के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर नाग का चित्र बनाकर उसकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे भित्ति चित्र नाग पूजा कहा जाता है। ऐसा करने से घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और सुख-शांति बनी रहती है।
नाग पंचमी पर क्या करें?
नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा की जाती है। महिलाएं घर में विशेष पकवान बनाती हैं और ब्राह्मणों को खीर, लड्डू या अन्य मिष्ठान का भोजन कराती हैं।
इसके अलावा भगवान शिव के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करना और नाग देवता के प्रति श्रद्धा प्रकट करना भी शुभ माना जाता है।
क्या काल सर्प दोष से राहत दिलाती है नाग पूजा?
ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि जिन लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, वे नाग पंचमी के दिन नाग देवता की विशेष पूजा कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे मानसिक तनाव, जीवन की बाधाओं और आर्थिक परेशानियों में कमी आती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
संतान सुख और पूर्वजों के आशीर्वाद से भी जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से निःसंतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। वहीं शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि जीव-जंतुओं, विशेषकर नागों के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना चाहिए। नाग पंचमी का पर्व हमें प्रकृति और सभी प्राणियों के प्रति करुणा, संरक्षण और सह-अस्तित्व का संदेश देता है।
नाग पंचमी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के पूजा स्थल या मुख्य द्वार पर नाग देवता का चित्र बनाएं या प्रतिमा स्थापित करें।
- हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
- नाग पंचमी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
- भगवान शिव और नाग देवता की आरती करें।
- परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्रार्थना करें।
नाग पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि श्रद्धा, करुणा और सह-अस्तित्व ही जीवन को सुखमय बनाते हैं।
