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गणेशजी को क्यों प्रिय है दूर्वा ! जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा, इसे चढ़ाने के नियम और मंत्र

विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करते समय दूर्वा चढ़ाना बेहद जरूरी माना जाता है। अगर आप गणेशजी की पूजा कर रहे हैं तो दूर्वा चढ़ाते समय कुछ नियमों का जरूर पालन करें।

  • Written By: रीना पंवार
Updated On: Sep 07, 2024 | 04:00 AM

(डिजाइन फोटो)

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हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi 2024 ) का पावन पर्व शनिवार, 7 सितंबर 2024 यानी आज से शुरू हो गया है। 10 दिन तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान गणपति बप्पा की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और ऋद्धि-सिद्धि का स्वामी भी कहा जाता है। इनका स्मरण, ध्यान, जप और आराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करते समय दूर्वा चढ़ाना बेहद जरूरी माना जाता है। अगर आप भगवान गणेश की विधिवत पूजा कर रहे हैं तो दूर्वा चढ़ाते समय कुछ नियमों का भी जरूर पालन करें, इससे घर में सुख-शांति व समृद्धि के साथ गजानन की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी। आइए जान लेते हैं आखिर क्यों भगवान गणेश को प्रिय है दूर्वा और क्या है इससे जुड़ी कथा व नियम……..

दूर्वा से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। इस दैत्य के कोप से स्वर्ग और धरती पर त्राहि-त्राहि मची हुई थी। अनलासुर ऋषि-मुनियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। दैत्य से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि महादेव के पास प्रार्थना करने पहुंचे।

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सभी ने शिवजी से प्रार्थना की कि वे अनलासुर के आतंक का नाश करें। शिवजी ने कहा कि अनलासुर का अंत केवल श्रीगणेश ही कर सकते हैं। तब गणेश जी ने अनलासुर को निगल लिया जिससे उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। कई प्रकार के उपाय करने के बाद भी गणेशजी के पेट की जलन शांत नहीं हो रही थी। इसके समाधान के लिए तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठ बनाकर श्रीगणेश को खाने को दी। जब गणेशजी ने दूर्वा ग्रहण की तो उनके पेट की जलन शांत हो गई। तभी से श्रीगणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई।

ऐसी दूर्वा करें अर्पित

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जीवन में सुख व समृद्धि की प्राप्ति के लिए श्री गणेश जी को दूर्वा जरूर अर्पित की जानी चाहिए। दूर्वा एक प्रकार की घास है। जिसे किसी भी बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। भगवान श्रीगणेश को अर्पित की जाने वाली दूर्वा में 3 या 5 गांठ होनी चाहिए। ऐसी दूर्वा उन्हें अर्पित की जाती है।

क्या हैं दूर्वा चढ़ाने के नियम

शास्त्रों के अनुसार, गणपति जी को दूर्वा हमेशा चरणों में चढ़ानी चाहिए। दूर्वा चढ़ाने से पहले उसे साफ पानी से जरूर धोएं।

पूजा में हमेशा दूर्वा को जोड़ा बनाकर भगवान को चढ़ाएं। दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के मंत्रों का जाप करना चाहिए।

भगवान गणेश को दूर्वा घास के 11 जोड़ों को चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।

दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के इन 11 मंत्रों का करें जाप-

ऊँ गं गणपतेय नमः
ऊँ गणाधिपाय नमः,
ऊँ उमापुत्राय नमः,
ऊँ विघ्ननाशनाय नमः
ऊँ विनायकाय नमः
ऊँ ईशपुत्राय नमः
ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
ऊँ एकदन्ताय नमः
ऊँ इभवक्ताय नमः
ऊँ मूषकवाहनाय नमः
ऊँ कुमारगुरवे नमः

लेखिका- सीमा कुमारी

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Published On: Sep 07, 2024 | 04:00 AM

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