Mesh Sankranti: कब है मेष संक्रांति 2026? नोट कीजिए स्नान-दान और पूजा का शुभ मुहूर्त
Mesh Sankranti Snan Daan Muhurat: मेष संक्रांति 2026 के दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ नए सौर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस पावन अवसर पर स्नान-दान और पूजा का विशेष महत्व होता है।
- Written By: सीमा कुमारी
मेष संक्रांति (सौ.GEMINI)
Mesh Sankranti 2026 Kab Hai: सनातन धर्म में मेष संक्रांति का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सूर्य देव की पूजा- अर्चना करना अत्यंत फलदायी होता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाता है, तो हम इसे संक्रांति कहते हैं। अभी वर्त्तमान में सूर्य देव मीन राशि में हैं, लेकिन जल्द ही इसी महीने वो अपनी उच्च राशि यानी मेष में प्रवेश करेंगे, तब मेष संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
मेष संक्रांति का क्या है महत्व
मेष संक्रांति के दिन सूर्य पूजन और स्नान-दान का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त बड़ी संख्या में गंगा स्नान और दान-पुण्य करते हैं। मेष संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो जाता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं। इस दिन सूर्य देव की पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है।
कब है मेष संक्रांति?
पंचांग के अनुसार, मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पुण्य काल सुबह 6:22 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक रहेगा। वहीं महापुण्य काल सुबह 7:33 बजे से 11:44 बजे तक है। यह समय स्नान और दान के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
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मेष संक्रांति स्नान-दान शुभ मुहूर्त
संक्रांति के दिन स्नान-दान के लिए पुण्यकाल और महापुण्य काल का समय सबसे शुभ माना जाता है। मेष संक्रांंति के दिन पुण्यकाल और महापुण्य काल के समय ही स्नान-दान करें। इससे विशेष लाभ प्राप्त होता है।
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मेष संक्रांति पर कैसे कैरे पूजा
- सुबह सूर्योदय से पहले पवित्र नदी या घर पर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य देने का संकल्प लें।
- तांबे के लोटे में पानी, लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके अर्घ्य दें।
- सूर्य देव को लाल फूल, तिल और गुड़ अर्पित करें।
- ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें।
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और पूजा के अंत में सूर्य देव की आरती करें।
- इस दिन सत्तू (भुने चने का आटा), गेहूं, गुड़, या तिल का दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है।
- इस दिन सात्विक भोजन करें और नमक का सेवन न करें।
