Mesh Sankranti : मेष संक्रांति के दिन क्यों करते हैं सत्तू का दान? जानिए इसके पीछे छुपे राज़
Sattu Festival Rituals: मेष संक्रांति के दिन सत्तू का दान करने की परंपरा धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह शरीर को ठंडक देता है और सुख-समृद्धि लाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
मेष संक्रांति (सौ.GEMINI)
Mesh Sankranti Donate Sattu : 14 अप्रैल 2026 को मेष संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का बड़ा महत्व है। यह पर्व सूर्य देव की पूजा के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि, मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य और धन-ऐश्वर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए इस दिन हिन्दू श्रद्धालु बड़ी संख्या में गंगा स्नान और दान-पुण्य करते हैं।
मेष संक्रांति पर सत्तू दान करने की क्यों हैं? परंपरा
मेष संक्रांति पर सत्तू दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही हैं। धार्मिक दृष्टि से सत्तू का दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती हैं।
वहीं, वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो अप्रैल के महीने से गर्मी बढ़ने लगती है, ऐसे में सत्तू शरीर को ठंडा रखता है और ऊर्जा प्रदान करता हैं। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को सत्तू, जल, फल और वस्त्र का दान करना बहुत ही फलदायी माना गया हैं।
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अलग-अलग राज्यों में मेष संक्रांति का उत्सव
भारत में मेष संक्रांति का खास महत्व है, और इसे अलग-अलग राज्यों में अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। जैसे- बैसाखी पंजाब, पोइला बोइशाख पश्चिम बंगाल, पुथंडु तमिलनाडु और बोहाग बिहू असम जैसे त्योहार इसी दिन या इसके आसपास मनाए जाते हैं ।
यह दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का प्रतीक होता है और कई जगह इसे नए साल की शुरुआत भी माना जाता है।
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मेष संक्रांति का धार्मिक महत्व
हिन्दू धर्म में इस पर्व का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में ऊर्जा, सफलता और सकारात्मकता का संचार होता है इस दिन से सूर्य उत्तरायण के प्रभाव को और अधिक मजबूत करता है, जिससे दिन बड़े और मौसम गर्म होने लगता है।
यही कारण है कि इसे नई शुरुआत, उन्नति और शुभ कार्यों के आरंभ का समय माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। खासकर गंगा स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा बेहद शुभ मानी जाती है।
