बैसाख में इस दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, इन विशेष मंत्रों के जाप से दूर होंगे कष्ट, बनेंगे सुख-समृद्धि के योग

Benefits Of Krishna Janmashtami Vrat: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा और विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि के योग बनते हैं।
Vaishakh Krishna Janmashtami Date
श्री कृष्ण (सौ.AI)
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Vaishakh Krishna Janmashtami Date: हिन्दू धर्म में बैसाख महीने का बड़ा महत्व है। चैत्र महीने के समापन के साथ ही वैशाख महीना शुरू हो जाता है। वैशाख महीने में कई तीज और त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार वैशाख महीने का मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 9 अप्रैल को है।

संतान प्राप्ति की बाधा दूर होती है

श्री कृष्ण भक्तों के लिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत बड़ा महत्व रखता है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा और उपायों को करने से संतान प्राप्ति की बाधा दूर होती है साथ ही भक्तों पर भगवान श्री कृष्ण की असीम कृपा भी बरसती है।

कब है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी?

अप्रैल 2026 में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि इस प्रकार है: अष्टमी तिथि प्रारंभ: 9 अप्रैल 2026, रात 09:19 बजे अष्टमी तिथि समाप्त: 10 अप्रैल 2026, रात 11:15 बजे

पूजा का शुभ मुहूर्त

10 अप्रैल को दोपहर 12:00 बजे से 12:45 बजे तक इस समय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, आरती और मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा क्यों है खास?

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का दिन भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सच्चे मन से पूजा और व्रत करने पर भगवान की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन की परेशानियाँ कम होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हिन्दू धर्म ग्रथो में भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, भक्ति, धर्म और सत्य का प्रतीक माना जाता हैं। भगवान श्रीकृष्ण हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता हैं। मासिक जन्माष्टमी पर उनकी पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती हैं।

पूजा में करें इन मंत्रों का जाप

इस दिन श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए इन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है:

ॐ कृष्णाय नमः

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात ॐ नमो भगवते तस्मै कृष्णाय कुण्ठमेधसे

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