प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. एआई)
March Festival List: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मार्च 2026 का महीना खगोलीय और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस महीने ग्रहों की स्थिति में कई बड़े फेरबदल होंगे जो मानव जीवन और प्रकृति पर गहरा प्रभाव डालेंगे।
वर्ष 2026 में मार्च महीने का प्रारंभ फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि (1 मार्च) से हो रहा है। संवत् 2082 के इस माह में फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च को होगी। इसके पश्चात 4 मार्च से चैत्र मास का कृष्ण पक्ष शुरू होगा। आमांत परंपरा (गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत) को मानने वाले क्षेत्रों में इसे फाल्गुन कृष्ण पक्ष कहा जाएगा। 19 मार्च से चैत्र शुक्ल पक्ष का आरंभ होगा जिसके साथ ही हिंदू नववर्ष के उल्लास की आहट सुनाई देगी।
मार्च के महीने में सूर्य उत्तरायण की अपनी यात्रा जारी रखेंगे। माह के पूर्वार्ध में शिशिर ऋतु का प्रभाव रहेगा वहीं 15 मार्च से वसंत ऋतु का आगमन होगा जो प्रकृति में नवीनता और सौंदर्य लेकर आएगी। खगोलीय दृष्टि से देखें तो 1 मार्च को दिन की अवधि 11 घंटे 30 मिनट होगी, जो महीने के अंत तक बढ़कर 12 घंटे 14 मिनट हो जाएगी। सूर्य के उत्तरायण होने के कारण दिन बड़े और रातें छोटी होती जाएँगी।
इस माह कई बड़े ग्रह अपनी स्थिति बदल रहे हैं।
सूर्य: 14 मार्च की रात 3:38 बजे कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
गुरु व बुध: वक्री चल रहे गुरु 11 मार्च को मिथुन राशि में मार्गी होंगे। वहीं, वक्री बुध 21 मार्च को कुंभ राशि में मार्गी होंगे।
शुक्र: शुक्र का गोचर भी तीव्र रहेगा; वे 1 मार्च को मीन में और 25 मार्च को मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
शनि व राहु: शनि और राहु इस पूरे माह क्रमशः मीन और कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे।
मार्च 2026 का महीना धार्मिक और राष्ट्रीय उत्सवों से परिपूर्ण है। महीने की शुरुआत होलाष्टक समाप्ति और 2 मार्च को होलिका दहन के साथ होगी, जिसके बाद 4 मार्च को मुख्य होली (रंगोत्सव) मनाई जाएगी। 8 मार्च को रंग पंचमी और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का संयोग है।
महीने का उत्तरार्ध आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ, कलश स्थापना और गुड़ी पड़वा (हिंदू नववर्ष) मनाया जाएगा। 23 मार्च को शहीद दिवस (भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव) और 26 मार्च को महाअष्टमी का पर्व है। 27 मार्च को श्रद्धा के साथ श्रीराम नवमी मनाई जाएगी।
जैन समुदाय के लिए 31 मार्च को भगवान महावीर जयंती का विशेष उत्सव है। साथ ही इसी दिन वित्तीय वर्ष का समापन भी होगा। इस माह में सर्वार्थसिद्धि और द्विपुष्कर जैसे कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम हैं।
मार्च 2026 का महीना धार्मिक विविधताओं से भरा है। जैन धर्म में दिगंबर समाज के लिए अष्टान्हिका व्रत की पूर्णता (3 मार्च), ऋषभनाथ जयंती (12 मार्च) और दशलक्षण पर्व का प्रारंभ (23 मार्च) मुख्य हैं। वहीं, श्वेतांबर समाज में आदिनाथ मोक्ष कल्याणक (11 मार्च) और भगवान महावीर जन्म कल्याणक (31 मार्च) श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे।
खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाने वाला पुष्य नक्षत्र इस माह दो बार आएगा। पहला 1 मार्च को सूर्योदय से सुबह 8:17 तक और दूसरा 27 मार्च की शाम से 28 मार्च की दोपहर तक। वहीं, सावधानी बरतने वाले पंचक का काल 16 मार्च की शाम से शुरू होकर 20 मार्च की रात तक रहेगा।
श्रद्धालुओं के लिए मार्च का महीना आध्यात्मिक यात्राओं का समय है। इस दौरान प्रसिद्ध नर्मदा पंचक्रोशी पदयात्रा दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण 14 से 18 मार्च तक (बाला मर्दाना से कतरगाँव) और द्वितीय चरण 29 मार्च से महिष्मति (महेश्वर) से प्रारंभ होगा।