

नवरात्रि के चौथे दिन होती है मां कूष्मांडा की पूजा
जानें पूजा के सही नियम के साथ भोग और चमत्कारी फायदे
मां कूष्मांडा की कृपा से इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत
जानें कैसे चमक सकती है आपकी सोई हुयी किस्मत
Maa Kushmanda Puja Tips: शारदीय हो या चैत्र, नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा बड़े ही धूमधाम से की जाती है। नवरात्रि का चौथा दिन ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी मां कूष्मांडा को समर्पित होता है।
देवी भागवत पुराण की मानें तो जब इस सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था और चारों तरफ सिर्फ घना अंधेरा फैला हुआ था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी एक छोटी सी मंद मुस्कान से इस पूरे ब्रह्मांड को रच दिया था। इसी वजह से माता रानी को इस सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति भी कहा जाता है।
क्या आप जानते हैं कि मां कूष्मांडा का निवास स्थान कहां है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी मां कूष्मांडा सूर्यमंडल के भीतर बने लोक में निवास करती हैं। यही कारण है कि उनके भीतर सूर्य देव के समान ही अलौकिक और असीम तेज विद्यमान है। मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिनमें वे चक्र, गदा, धनुष, बाण, कमंडल, अमृत कलश, कमल और सभी प्रकार की सिद्धियों व निधियों को देने वाली जपमाला धारण करती हैं। मां की सच्चे मन से भक्ति करने वाले को जीवन में हर सुख मिलता है।
मां कूष्मांडा अपने भक्तों की पुकार बहुत जल्दी सुनती हैं और उन पर तुरंत प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करती हैं। माता रानी को मुख्य रूप से रोगों का नाश करने वाली देवी माना गया है। इनकी नियमित और विधि-विधान से पूजा करने पर पुरानी से पुरानी बीमारियों से छुटकारा मिलता है और इंसान को लंबी उम्र व अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। चूंकि मां का वास सूर्यमंडल में है, इसलिए इनकी पूजा से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, बुद्धि तेज होती है और समाज में खूब मान-सम्मान व यश-कीर्ति मिलती है।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर दूसरा इंसान मानसिक तनाव या अनजाने डर से परेशान रहता है। मां कूष्मांडा की हल्की सी मुस्कान भक्तों के जीवन से हर तरह का तनाव, अवसाद और अज्ञात भय पल भर में दूर कर देती है। उनकी कृपा से व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता और निर्णय लेने की बुद्धि बेहद कुशाग्र हो जाती है। इसके अलावा, जो साधक भक्ति भाव से माता की उपासना करता है, उसे जीवन में सभी आठ सिद्धियां और नौ निधियां (भौतिक व आध्यात्मिक सुख) आसानी से हासिल हो जाती हैं।
नवरात्रि के चौथे दिन पूजा करते समय कुछ आसान लेकिन जरूरी नियमों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, ताकि आपको पूजा का पूरा फल मिल सके। इस दिन हरे रंग का इस्तेमाल करना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि मां कूष्मांडा को हरा रंग सबसे ज्यादा पसंद है। इसीलिए पूजा के दौरान हरे रंग के कपड़े पहनें। साथ ही, माता रानी को हरी चूड़ियां, हरे रंग के वस्त्र या फिर मेंहदी चढ़ाना बहुत फलदायी होता है। ध्यान रखें कि पूजा के दौरान घर और मंदिर में साफ-सफाई का खास ख्याल रखें।
माता कूष्मांडा को खाने में मालपुआ बहुत पसंद है। इसलिए चौथे दिन पूजा के समय मां को मालपुए का भोग जरूर लगाएं। अगर मालपुआ न हो तो आप हलवे या ताजे दही का भोग भी चढ़ा सकते हैं। पूजा खत्म होने के बाद इस प्रसाद को परिवार और आसपास के लोगों में बांट दें। इसके अलावा मां को 'कुम्हड़ा' यानी सफेद पेठा बेहद प्रिय है। माना जाता है कि इसी कुम्हड़े से इनका नाम कूष्मांडा पड़ा है। पूजा में माता को साबुत पेठा अर्पित करने से वे तुरंत प्रसन्न होती हैं।
मां कूष्मांडा का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा करते समय उनके सिद्ध मंत्र का स्पष्ट उच्चारण के साथ कम से कम 108 बार जाप जरूर करना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है....
“या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
इस मंत्र का जाप करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। ध्यान रखें कि इस दिन अपने मन में किसी के प्रति बुरा विचार, जलन या द्वेष न लाएं। पूरी सात्विकता और शांत मन के साथ ही माता की पूजा-अर्चना करें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो मां कूष्मांडा का सीधा संबंध सूर्य ग्रह और बुध ग्रह से माना गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे सूर्यमंडल को नियंत्रित करती हैं और उन्हें हरा रंग प्रिय है। इस वजह से चौथे दिन की पूजा का सबसे बड़ा फायदा सिंह, कन्या और मिथुन राशि वाले जातकों को मिलता है। सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य देव हैं, जिन्हें मां कूष्मांडा दिशा देती हैं। इस पूजा से सिंह राशि वालों को करियर में बहुत बड़ी सफलता, सरकारी नौकरी के योग और लीडरशिप क्वालिटी में जबरदस्त बढ़त मिलती है।
वहीं दूसरी तरफ, कन्या और मिथुन राशि के स्वामी बुध ग्रह हैं। चूंकि माता को हरा रंग पसंद है, इसलिए इन दोनों राशियों के लोगों की व्यापार से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। अगर आप पर कोई पुराना कर्ज है, तो उससे राहत मिलने के योग बनते हैं। शिक्षा, पढ़ाई और लेखन के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को अपार सफलता मिलती है। अगर मिथुन, कन्या या सिंह राशि के जातक नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को हरी इलायची और मालपुए का भोग लगाने से उनकी सोई हुई किस्मत भी रातों-रात चमक सकती है।