Lord Vishnu: आज है निर्जला एकादशी, इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी-नारायण की पूजा, पूरी होगी हर मनोकामना
Lord Vishnu Puja :आज निर्जला एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-नारायण की विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु (सौ.AI)
Nirjala Ekadashi Shubh Muhurat : आज 25 जून गुरुवार को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। धर्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से पूरे वर्ष की एकादशियों के बराबर पुण्य और फल प्राप्त होता है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर प्रारंभ होगा और पूजा का ये शुभ मुहूर्त दोपहर में 02 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. इस समय में पूजा करना बहुत लाभकारी होगा।
निर्जला एकादशी शुभ समय
आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 05 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तक रहा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
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रवि योग आज सुबह 05 बजकर 25 मिनट पर शुरू हुआ। ये योग शाम को 04 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, सुबह 10 बजकर 53 मिनट से देर रात तक सिद्ध योग का प्रभाव रहने वाला है। सिद्ध योग बनने से पहले शिव योग सक्रिय रहेगा। गुरुवार और एकादशी का संयोग भी आज है।
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निर्जला एकादशी व्रत और पूजा विधि
- निर्जला एकादशी को सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं। साफ कपड़े पहनें। उसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर लें।
- सुबह में हाथ में जल और फूल लेकर निर्जला एकादशी व्रत और विष्णु पूजा का संकल्प करें। उसके बाद शुभ मुहूर्त और रवि योग में भगवान विष्णु की पूजा करें।
- सबसे पहले एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उसे फूल और माला से सजाएं. उस पर भगवान विष्णु की स्थापना करें।
- अब आप पंचामृत से श्रीहरि को स्नान कराएं। उनको पीले फूल, अक्षत्, चंदन, हल्दी, तुलसी के पत्ते, धूप, दीप, फल, पान के पत्ते, सुपारी, वस्त्र आदि चढ़ाएं।
- फिर विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा का पाठ करें।
- निर्जला एकादशी की व्रत कथा सुनें। उसके बाद कपूर या घी के दीपक से आरती करें। पूजा के समापन के बाद मिट्टी के कलश में साफ पानी भरकर दान करें।
- दिनभर उपवास रखें। भक्ति और भजन में समय दें। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीप जलाएं. विष्णु पूजा करें. फिर रात्रि के समय में जागरण करें।
- अगले दिन सुबह में स्नान आदि से निवृत हो जाएं। अपनी क्षमता के अनुसार वस्त्र, अन्न, जल, फल आदि का दान करें।
- उसके मुख में तुलसी का पत्ता और गंगाजल या पवित्र जल ग्रहण करके पारण करें और व्रत पूरा करें. श्रीहरि से प्रार्थना करें कि वो आपकी मनोकामनाएं पूरी करें।
