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हनुमान जी राम की अंगूठी कहाँ रखकर ले गए? जानिए वो रहस्य जो हर भक्त को चौंका देगा

Hanuman Ram Ring Story: रामायण के कई प्रसंग ऐसे हैं, जिनमें गहरे अर्थ और भक्ति की मिसाल छिपी है। उन्हीं में से एक है हनुमान जी द्वारा प्रभु श्रीराम की अंगूठी को लेकर लंका जाना।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Apr 25, 2026 | 05:49 PM

Hanuman Ram Ring Story (Source. Pinterest)

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Ramayan Facts About Hanuman: रामायण के कई प्रसंग ऐसे हैं, जिनमें गहरे अर्थ और भक्ति की मिसाल छिपी है। उन्हीं में से एक है हनुमान जी द्वारा प्रभु श्रीराम की अंगूठी को लेकर लंका जाना। यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि आखिर हनुमान जी ने उस अंगूठी को कहाँ रखा था?

श्रीराम ने क्यों दी थी अंगूठी?

जब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को माता सीता की खोज में भेजा, तब उन्होंने अपनी पहचान के रूप में एक विशेष मुद्रिका यानी अंगूठी उन्हें सौंपी थी। यह अंगूठी केवल एक आभूषण नहीं थी, बल्कि यह विश्वास और पहचान का प्रतीक थी, जिससे सीता माता को यह यकीन हो सके कि हनुमान जी वास्तव में राम के दूत हैं।

हनुमान जी ने अंगूठी कहाँ रखी?

हनुमान जी ने उस अनमोल अंगूठी को बड़ी सावधानी से अपने मुख में रख लिया था। मुख में अंगूठी रखने का मुख्य कारण उसकी सुरक्षा था। जब वे विशाल समुद्र को लांघकर लंका की ओर बढ़ रहे थे, तब यह जरूरी था कि अंगूठी कहीं गिर न जाए। इसीलिए उन्होंने उसे अपने मुख के भीतर सुरक्षित रखा।

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शास्त्रों में भी मिलता है उल्लेख

वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में इसका स्पष्ट वर्णन मिलता है कि हनुमान जी ने अंगूठी को अपने मुख में दबाकर सुरक्षित रखा था। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में इस प्रसंग को सुंदर शब्दों में लिखा है: “हनुमान तेहि समय मुद्रिका दीन्हि। मुख महुँ राखि कपि गवनु कीन्हि॥” इसका अर्थ है कि हनुमान जी ने उस समय अंगूठी ली और उसे अपने मुख में रखकर यात्रा शुरू की।

लंका में कैसे किया उपयोग?

जब हनुमान जी लंका पहुँचे और अशोक वाटिका में माता सीता को दुखी अवस्था में देखा, तब उन्होंने वही अंगूठी उनके सामने प्रस्तुत की। अंगूठी देखते ही माता सीता को विश्वास हो गया कि हनुमान जी श्रीराम के ही दूत हैं। यह क्षण रामायण का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण प्रसंग माना जाता है।

ये भी पढ़े: महाभारत का रहस्य: कृष्ण के सफेद घोड़े और योद्धाओं के अलग-अलग शंख, जानकर चौंक जाएंगे

भक्ति और बुद्धिमत्ता की मिसाल

यह घटना हनुमान जी की अटूट भक्ति, बुद्धिमत्ता और जिम्मेदारी को दर्शाती है। उन्होंने न केवल अपने कार्य को पूरी निष्ठा से निभाया, बल्कि हर कदम पर सावधानी भी बरती।

भक्तिों के लिए खास प्रसंग

रामायण का यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति के साथ-साथ समझदारी और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी होती है। हनुमान जी द्वारा अंगूठी को मुख में रखना केवल एक साधारण कार्य नहीं, बल्कि उनकी दूरदर्शिता और समर्पण का प्रतीक है।

Lord hanuman place rama ring before carrying it away

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Published On: Apr 25, 2026 | 05:49 PM

Topics:  

  • Lord Hanumam
  • Sanatana Dharma
  • Spiritual

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