अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इन 3 खास जगहों पर जलाएं दीपक
अक्षय तृतीया का दिन अबूझ मुहूर्त में से एक है। इस दिन किए गए सभी कार्य लाभकारी माने जाते हैं, जिनमें दीपक जलाना भी शामिल है। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
- Written By: सीमा कुमारी
अक्षय तृतीया पर इन स्थानों पर दीपक जलाना शुभ (सौ.सोशल मीडिया)
Akshaya Tritiya 2025: 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म में इस तिथि का बड़ा महत्व है। अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन त्रेता युग का आरंभ भी माना जाता है। कहते हैं आज के दिन किए गए कार्यों से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया का दिन अबूझ मुहूर्त में से एक है। इस दिन किए गए सभी कार्य लाभकारी माने जाते हैं, जिनमें दीपक जलाना भी शामिल है। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया पर किस मुहूर्त में दीपक जलाना शुभ रहेगा।
अक्षय तृतीया पर इन स्थानों में दीपक जलाना शुभ रहेगा
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ज्योतिषयों के अनुसार, अक्षय तृतीया के अवसर पर घर के 5 स्थानों पर दीपक जलाना अनिवार्य है। सबसे पहले, दीपक को घर के मंदिर में जलाना चाहिए, जिससे घर में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है और सकारात्मकता का अनुभव होता है। इसके बाद, तुलसी के पौधे के पास दूसरा दीपक जलाने से मां लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
अक्षय तृतीया के अवसर पर, मुख्य द्वार पर तीसरा दीपक जलाना आवश्यक है। इससे घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा रुकती है और पितरों का आशीर्वाद भी बना रहता है. इसी दिन, चौथा दीपक रसोई में जलाना चाहिए, जहाँ मां अन्नपूर्णा का निवास होता है इस प्रकार, घर की समृद्धि बनाए रखने के लिए रसोई में दीप जलाना महत्वपूर्ण है।
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अक्षय तृतीया के अवसर पर अंतिम दीया, अर्थात् पांचवां दीया, पीपल के वृक्ष के नीचे जलाना चाहिए। पीपल के वृक्ष में देवी-देवताओं का निवास होता है. इसके अतिरिक्त, पीपल के वृक्ष में ग्रह भी स्थित होते हैं और पितरों का स्थान भी यही है। इस प्रकार, अक्षय तृतीया के दिन पीपल के वृक्ष के समीप दीया जलाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और ग्रह तथा पितृ शांत होते हैं।
