

Ketu In First House Effects: कुंडली में राहु-केतु को अशुभ फल देने वाला माना जाता है, लेकिन केतु ग्रह ज्योतिष में एक छाया ग्रह है जो वैराग्य, आध्यात्मिकता, ज्ञान और मोक्ष का प्रतीक है। दूसरी ओर, पहला भाव यानी लग्न व्यक्ति के व्यक्तित्व, आत्म-चेतना और शारीरिक बनावट का कारक होता है।
जब केतु पहले भाव में होता है, तो यह व्यक्ति के जीवन पर रहस्यमयी ढंग से गहरा प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति अच्छे और बुरे दोनों परिणाम दे सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति के कुंडली में अन्य ग्रहों की दशा कैसी है।
केतु ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे जीवन पर प्रत्यक्ष पड़ता है। ज्योतिष में केतु एक क्रूर ग्रह है, परंतु यदि केतु कुंडली में मजबूत होता है, तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमजोर होने पर यह अशुभ फल देता है।
केतु का बीज मंत्र:
ॐ कें केतवे नमः
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में 108 बार इस मंत्र का जाप करने से केतु का प्रभाव कम होता है।