

Highlights:
कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है।
तुलसी पूजा के लिए जल, फूल, रोली और दीपक रख सकते हैं।
सुबह तुलसी को जल चढ़ाकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
शाम को तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है।
तुलसी पूजा के साथ पौधे की साफ-सफाई और देखभाल का भी ध्यान रखें।
Kartik Maas Tulsi Puja Vidhi: शरद पूर्णिमा के बाद कार्तिक माह की शुरुआत हो जाती है। हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने में तुलसी पूजा का भी खास महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी माता भगवान विष्णु को प्रिय हैं और उनकी पूजा को श्रद्धा व भक्ति से जोड़कर देखा जाता है।
ऐसे में कई लोग कार्तिक मास के दौरान घर में तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं और नियमित पूजा करते हैं। अगर आप भी इस महीने तुलसी पूजा करना चाहते हैं, तो जानिए इसकी आसान विधि और इससे जुड़ी प्रमुख परंपराएं।
धार्मिक मान्यताओं में तुलसी को पवित्र पौधा माना गया है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है। कार्तिक मास में श्रद्धालु तुलसी की पूजा करके परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। कई घरों में सुबह और शाम तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है।
पूजा करने से पहले जरूरी सामग्री एक जगह रख लें। इसके लिए स्वच्छ जल, दीपक, रुई की बत्ती, घी या तेल, फूल और रोली जैसी सामान्य पूजा सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। सामग्री का चयन अपने परिवार की परंपरा और उपलब्धता के अनुसार करें। पूजा को सरल रखने के लिए बहुत सारी चीजें जुटाना जरूरी नहीं है।
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और तुलसी के पौधे के पास साफ-सफाई कर लें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक तुलसी को थोड़ा जल अर्पित करें। फिर फूल चढ़ाएं और अपनी परंपरा के अनुसार रोली लगाएं। तुलसी के पास सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाकर भगवान विष्णु का स्मरण करें। आप चाहें तो अपनी श्रद्धा के अनुसार तुलसी मंत्र या भगवान विष्णु के नाम का जाप भी कर सकते हैं।
कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपक जलाना कई परिवारों की पुरानी परंपरा है। दीपक को प्रकाश, आस्था और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। कुछ लोग सुबह और शाम दोनों समय दीपक जलाते हैं, जबकि कुछ परिवार शाम की पूजा को प्राथमिकता देते हैं। दीपक ऐसी सुरक्षित जगह रखें जहां पौधे की पत्तियों और आसपास की वस्तुओं को नुकसान न पहुंचे।
तुलसी के पौधे को पर्याप्त धूप और जरूरत के अनुसार पानी दें। पूजा करते समय पौधे की पत्तियों को अनावश्यक रूप से न तोड़ें। तुलसी दल तोड़ने से जुड़े नियम अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए अपने परिवार की रीति का पालन करें।