

Highlights
कार्तिक मास में पूजा-पाठ और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है।
इस महीने में सुबह स्नान करने की पारंपरिक मान्यता है।
कार्तिक मास में दीपदान करना शुभ माना जाता है।
तुलसी पूजा और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा प्रचलित है।
श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार पूजा, सेवा और भक्ति के कार्य कर सकते हैं।
Kartik Maas Kab Se Shuru: हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, स्नान, दान और दीपदान के लिए विशेष माना जाता है। वर्ष 2026 में कार्तिक मास 27 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। हालांकि, कार्तिक स्नान की शुरुआत 26 अक्टूबर से मानी जा रही है। इस महीने में भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा करने, दीपक जलाने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने की खास परंपरा है। आइए जानते हैं कार्तिक मास का धार्मिक महत्व और इस दौरान निभाई जाने वाली प्रमुख परंपराओं के बारे में।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस महीने में श्रद्धालु सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
कई लोग नियमित रूप से मंत्र जाप, भजन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी करते हैं। इन परंपराओं को मन की शांति और भक्ति से जोड़कर देखा जाता है।
कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा प्रचलित है। कुछ श्रद्धालु नदियों या अन्य पवित्र जलस्रोतों में स्नान करते हैं, जबकि कई लोग घर पर ही स्नान करके पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता में इस स्नान को आत्मिक शुद्धता और अनुशासन से जोड़ा जाता है। अपनी सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस परंपरा का पालन किया जा सकता है।
कार्तिक मास में दीपदान करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु मंदिरों, घरों और तुलसी के पास दीपक जलाते हैं। कुछ स्थानों पर नदी या तालाब के किनारे भी दीपदान की परंपरा है। दीपक को प्रकाश, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस महीने में दीपदान के माध्यम से लोग श्रद्धा व्यक्त करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
कार्तिक मास में तुलसी के पौधे की पूजा करने की परंपरा भी है। श्रद्धालु तुलसी के पास दीपक जलाते हैं और जल अर्पित करते हैं। इसके अलावा जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करना अच्छा माना जाता है।
इस महीने में सुबह समय पर उठकर स्नान करें, पूजा के लिए कुछ समय निकालें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा या दान करें। नियमितता और सादगी के साथ निभाई गई ये परंपराएं त्योहार के आध्यात्मिक पक्ष को समझने का अवसर देती हैं।