Jyeshtha Maas 2026: मई से शुरू हो रहा ज्येष्ठ मास, इन नियमों का पालन करें और पाएं हनुमान जी की कृपा

Jyeshtha Month Importance: ज्येष्ठ मास को तप और भक्ति का महीना माना जाता है। इस दौरान नियमों का पालन और हनुमान जी की पूजा करने से विशेष कृपा और सुख-समृद्धि मिलती है।
Jyeshtha Maas 2026
Jyeshtha Maas (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Jyeshtha Maas 2026:  साल का तीसरा महीना ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू हो रहा हैं। यह महीना सनातन धर्म में आध्यात्मिक उन्नति और दान-पुण्य के लिए जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह साल का तीसरा महीना होता है और इसके स्वामी मंगल ग्रह हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन 'ज्येष्ठा नक्षत्र' होने के कारण ही इस महीने का नाम ज्येष्ठ पड़ा है। इस साल ज्येष्ठ मास में 'अधिक मास' का भी अद्भुत संयोग बन रहा है, जिसे भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए 'वरदान' माना जाता है।

ज्येष्ठ मास में क्या करना शुभ ?

इस महीने में गर्मी अपने चरम पर होती है, इसलिए शास्त्रों में शरीर और मन को शांत रखने वाले कार्यों पर जोर दिया गया है:

  • राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना

ज्येष्ठ में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना और पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना मानसिक शांति और वरुण देव का आशीर्वाद दिलाता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए तिल, अन्न और सत्तू का दान शुभ माना जाता है।

  • सात्विक भोजन

महाभारत के अनुसार, जो व्यक्ति ज्येष्ठ के महीने में केवल एक समय सात्विक भोजन करता है, वह निरोग (बीमारियों से दूर) और धनवान बनता है।

  • सूर्योदय से पहले स्नान करना

सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और वरुण देव की आराधना करना इस महीने में बहुत फलदायी है।

बड़ा मंगल का विशेष महत्व

ज्येष्ठ मास के सभी मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी। हर मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें। उन्हें बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं, इससे जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसी महीने में निर्जला एकादशी, गंगा दशहरा और वट सावित्री जैसे बड़े व्रत भी आते हैं।

ज्येष्ठ मास में क्या न करें?

इस पवित्र महीने में कुछ कार्यों की सख्त मनाही है:

  • दिन में सोना: शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ में दोपहर के समय सोने से भाग्य कमजोर होता है और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है (बीमार व्यक्ति को छूट है)।
  • बैंगन का त्याग: इस महीने बैंगन खाना वर्जित है। आयुर्वेद के हिसाब से यह गर्मी बढ़ाता है और धार्मिक नजरिए से इसे संतान के लिए कष्टकारी माना गया है।
  • पानी की बर्बादी: यह महीना जल के महत्व को समझाता है। पानी को व्यर्थ बहाने से 'वरुण दोष' लगता है, जिससे आर्थिक तंगी आ सकती है।
  • भारी और तामसिक भोजन: गर्मी के कारण पाचन शक्ति कमजोर रहती है, इसलिए अधिक तेल-मसाले और भारी भोजन से परहेज करें।