-
गुरु, 16 जुलाई 2026 ई-पेपर
Top News
- Hindi News »
- Religion »
- Jagannath Rath Yatra Salabega Story
Jagganath Rath Yatra: जब अपने मुस्लिम भक्त सालबेग के लिए रुक जाता है भगवान जगन्नाथ का रथ, जानिए अद्भुत कथा
- Written By: रीता राय सागर
Jagannath Rath Yatra Story: हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान, भगवान जगन्नाथ का रथ एक मुस्लिम भक्त सालबेग की समाधि पर कुछ देर के लिए रुकता है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी कथा के बारे में।

जगन्नाथ रथ यात्रा (फोटो.सोशल मीडिया)
Salabega Jagannath History: भगवान जगन्नाथ के परम भक्त कहे जाने वाले सलाबेग कहते हैं, निम्न जाति में जन्म लेने के बावजूद, मैं भगवान जगन्नाथ के चरणों में सेवा करने के लिए जीता हूँ। सलाबेग एक कवि थे, उनके सबसे पूजनीय भजनों में से एक है, ‘अहे नीला सैला’ गीत की यह सुंदर पंक्ति आज भी हर ओडिया घर में गूंजती है, विशेषकर रथ यात्रा उत्सव के दौरान।
महाप्रभु जगन्नाथ के परम भक्त कवि सलाबेग, ने भगवान के समक्ष इस प्रकार समर्पण किया कि उनका प्रेम जाति, जन्म या धर्म की सीमाओं से परे था। मुस्लिम होने के बावजूद, उनकी भक्ति ने जगन्नाथ रथ यात्रा की कई सारी परंपराओं में से एक कही जाने वाली सबसे मार्मिक परंपरा की शुरुआत की, जिसका पालन आज भी पूरी निष्ठा से किया जाता है। रथ यात्रा के दौरान, भगवान जगन्नाथ का नंदी घोष रथ सलाबेग की समाधि के पास कुछ देर के लिए रोका जाता है। यह 17वीं शताब्दी के संत-कवि के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
क्या कहानी है सलाबेगा
कहा जाता है कि महाप्रभु जगन्नाथ के महानतम भक्तों में से एक माने जाने वाले सलाबेग, मुगल सूबेदार मिर्जा लालबेग और एक हिंदू ब्राह्मण महिला के पुत्र थे। हालांकि उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था, फिर भी सलाबेगा अपनी माता के धर्म से बेहद प्रभावित थे। दरअसल एक युद्ध में मृत्यु के करीब पहुंचने के बाद उनका समर्पण भगवान जगन्नाथ के प्रति हो गया।
सम्बंधित ख़बरें
हरतालिका तीज 2026: साल में सिर्फ एक बार आता है ये दुर्लभ संयोग! जानिए कब रखें व्रत और क्यों है इस बार इतना खास
Mathura: द्वारकाधीश मंदिर में धूमधाम से निकली रथयात्रा, ठाकुर जी के दिव्य दर्शन को उमड़े हजारों श्रद्धालु
अकोला में कांवड़ और पालकी उत्सव की तैयारी तेज, 16 जुलाई को जिलाधिकारी कार्यालय में बैठक
रथ यात्रा से पहले सोने की झाड़ू से क्यों होती है मार्ग की सफाई? इसके पीछे छिपे हैं 3 रहस्यमयी कारण
युद्ध के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और कई तरह के इलाज के बावजूद उनके ठीक होने की उम्मीद बहुत कम थी। जब मेडिकल इलाज काम नहीं आया, तो उन्होंने अपनी मां की बात मानी और भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की। अपनी मां पर भरोसा करके, सलाबेगा ने सच्चे मन से महाप्रभु से प्रार्थना की। फिर उन्हें सपने में एक दिव्य रूप दिखाई दिया जिसने उनके घाव को ठीक कर दिया। उनका मानना था कि यह महाप्रभु की कृपा थी। उस पल ने सलाबेगा की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
जगन्नाथ रथ यात्रा (फोटो.सोशल मीडिया)
उस दिव्य अनुभव के बाद, सलाबेगा ने सब त्याग दिया और अपनी पूरी जिंदगी भगवान जगन्नाथ की पूजा में लगा दी। उन्होंने अनगिनत भक्ति गीत लिखे जो आज भी ओडिया घरों में गाए जाते हैं। उनके लिखे कुछ लोकप्रिय भजनों में ‘आहे नीला शैला’, ‘एका तो भक्त जीवन’, और ‘चली चलीजा नीलगिरी कालिया’ शामिल हैं।
जब महाप्रभु ने अपने भक्त का इंतजार किया
सलाबेगा से जुड़ी सबसे प्यारी कहानियों में से एक उस रिश्ते की झलक दिखाती है जो उनके और भगवान जगन्नाथ के बीच था। एक बार, वृंदावन से पुरी में रथ यात्रा में शामिल होने के लिए लौटते समय, भारी बारिश के कारण सलाबेगा को देर हो गई। जब वे तीर्थ नगरी से दूर फंसे हुए थे, तो उन्होंने महाप्रभु से प्रार्थना की कि उनके पहुँचने तक रथ आगे न बढ़े और तभी जैसे प्रभु ने उनकी प्रार्थना सुन ली और गुंडिचा की ओर जाते हुए, जब भगवान जगन्नाथ का रथ बड़ा डंडा पर चल रहा था, तो वह बालागंडी के पास रुक गया।
जगन्नाथ रथ यात्रा (फोटो.सोशल मीडिया)
मंदिर के सेवकों की तमाम कोशिशों के बावजूद रथ आगे नहीं बढ़ा। जब सलाबेगा उस जगह पर पहुँचे, तभी रथ फिर से आगे बढ़ना शुरू हुआ। अब उसी जगह पर सलाबेगा मंदिर बनाया गया है। महाप्रभु का रथ आज भी हर साल वहां रुकता है, ताकि भगवान अपने प्रिय भक्त से मिल सकें।
सलाबेग को मंदिर में जाने की नहीं थी इजाजत
चूंकि सलाबेगा को उनका धर्म मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं देता था, इसलिए वे बाहर से ही भगवान की पूजा करते थे। वे रोज श्रीमंदिर जाते थे और हर साल रथ यात्रा में शामिल होते थे। 1664 में उनके निधन के बाद, उस समय के गजपति महाराजा ने आदेश दिया कि इस मुस्लिम भक्त के सम्मान में सलाबेगा को बालागंडी में बड़ा डंडा के पास दफनाया जाए। बाद में उनकी समाधि को सलाबेगा मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।
आज भी उनकी समाधि पीठ पर रोज फूल, अगरबत्ती और फल चढ़ाए जाते हैं। आस्था और सांप्रदायिक सद्भाव की यह कहानी बताती है कि भक्त और प्रभु के बीच बस आस्था मायने रखती है।
Jagannath rath yatra salabega story
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
Aaj Ka Rashifal: गुरुवार को इस राशि की चमकेगी किस्मत, जानें सभी राशियों का दैनिक राशिफल
Jul 16, 2026 | 12:10 AM‘राम एक शादी करते हैं तो रहीम से भी यही उम्मीद…’ इंदौर में UCC पर बोले सीएम मोहन यादव- देखें VIDEO
Jul 15, 2026 | 11:23 PMआगरा कैंट विवाद: ट्रेनों को रोकना राष्ट्रविरोधी है, आरपीएफ कमांडेंट का विस्फोटक बयान; देखें VIDEO
Jul 15, 2026 | 11:22 PMगैरकानूनी काम करने वाले ही दिल्ली के चक्कर लगाते हैं…अरविंद सावंत का बागी सांसदों पर तीखा हमला
Jul 15, 2026 | 11:20 PMगलती हो गई, दोबारा अपराध नहीं करूंगा… कानपुर पुलिस ने गोली चलाने वाले बदमाश का 2 KM निकाला पैदल जुलूस- VIDEO
Jul 15, 2026 | 11:11 PMDhamaal 4 Collection: ‘वेलकम टू द जंगल’ पर भारी पड़ी अजय देवगन की ‘धमाल 4’, जल्द बनाएगी 100 करोड़ क्लब में जगह
Jul 15, 2026 | 11:08 PM2027 में योगी नहीं होंगे CM फेस? BJP प्रदेश अध्यक्ष के बयान से सियासी भूचाल! बताया कौन बनेगा मुख्यमंत्री
Jul 15, 2026 | 11:02 PMवीडियो गैलरी

बाबा रामदेव के बयान पर भड़के वारिस पठान, कहा- मुसलमान किसी के बाप से नहीं डरता, देखें VIDEO
Jul 15, 2026 | 10:58 PM
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का बढ़ा विरोध, महिलाओं ने सजाई प्रतीकात्मक चिता और फांसी का फंदा; देखें VIDEO
Jul 15, 2026 | 10:45 PM
या तो फांसी दो या एनकाउंटर करो! गौतम यादव के इंसाफ के लिए कैंडल मार्च निकाल रहे ग्रामीण! देखें VIDEO
Jul 15, 2026 | 10:35 PM
दोषी बर्खास्त नहीं हुए तो दे देंगे जान…आगरा कैंट स्टेशन की पटरियों पर कूदा डिप्टी SS का परिवार, VIDEO वायरल
Jul 15, 2026 | 10:30 PM
रूह कंपा देने वाला वीडियो! स्कूल जाने के लिए उफनती नदी पार करते मासूम, दांव पर लगी जिंदगी! देखें VIDEO
Jul 15, 2026 | 09:42 PM
ताजमहल में विदेशी महिला की खुलने लगी साड़ी, महिला कांस्टेबल ने किया कुछ ऐसा कि उड़ जाएंगे होश! देखें VIDEO
Jul 15, 2026 | 08:20 PM














