Indira Ekadashi: श्राद्ध कर लिया तो क्या फिर भी रखना चाहिए इंदिरा एकादशी का व्रत? जानें दोनों में फर्क

Indira Ekadashi Vrat: इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में पड़ने वाली खास एकादशी मानी जाती है। जानिए श्राद्ध और इंदिरा एकादशी व्रत में क्या अंतर है और इस व्रत से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं।
Indira Ekadashi Vrat shraddha Paksha difference.
इंदिरा एकादशीफोटो.सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Indira Ekadashi 2026: इंदिरा एकादशी का व्रत पितृ पक्ष के दौरान आता है, इस व्रत को लेकर अकसर कई सवाल उठते हैं- अगर परिवार में पितरों का श्राद्ध पहले ही किया जा चुका है, तो क्या इंदिरा एकादशी का व्रत रखना चाहिए। आइए जानते हैं श्राद्ध और इंदिरा एकादशी व्रत में क्या संबंध है। दोनों के उद्देश्य अलग हैं।

पितृ पक्ष में क्यों खास है इंदिरा एकादशी?

इंदिरा एकादशी का व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। 6 अक्टूबर को मनाई जाने वाली इंदिरा एकादशी का संबंध सामान्य एकादशी की तुलना में पितरों के कल्याण की कामना से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने वाले व्यक्ति अपने व्रत का पुण्य पितरों के कल्याण के लिए समर्पित करते हैं।

श्राद्ध कर चुके हैं तो क्या व्रत भी रखना चाहिए?

पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर लेने के बाद भी इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जा सकता है। लेकिन यह श्राद्ध की दूसरी प्रक्रिया नहीं है। श्राद्ध में पितरों के निमित्त तर्पण, अर्पण, भोजन और दान जैसे कर्म परिवार की परंपरा और तय तिथि के अनुसार किए जाते हैं। वहीं एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की उपासना, धैर्य-संयम और उपवास प्रमुख होते हैं। इसका अर्थ है श्राद्ध और एकादशी का व्रत दोनों दो अलग चीजें हैं और दोनों का उद्देश्य भी अलग है।

श्राद्ध और इंदिरा एकादशी में क्या अंतर है?

श्राद्ध: पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और उनके लिए किए जाने वाले धार्मिक कर्मों से जुड़ा है। पितृ पक्ष में पूर्वजों के लिए किया जाने वाला श्राद्ध उस तिथि के अनुसार किया जाता है, जिस तिथि को संबंधित पूर्वज का निधन हुआ था।

इंदिरा एकादशी व्रत: यह भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत है। पितृ पक्ष में पड़ने के कारण इसमें पितरों के कल्याण की भावना और व्रत के पुण्य को उन्हें समर्पित करने की मान्यता है।

Indira Ekadashi Vrat shraddha Paksha difference.
इसलिए आज के दिन उत्तर दिशा में यात्रा से बचें, एकादशी तिथि पर बन रहा है सिद्ध योग का संयोग

पद्म पुराण में मिलता है इसका उल्लेख

इंदिरा एकादशी की कथा का उल्लेख पद्म पुराण में मिलता है। कथा में राजा इंद्रसेन के पिता से जुड़ी कहानी का प्रसंग बताया गया है। पिता के लिए राजा को इंदिरा एकादशी का व्रत करने और उससे प्राप्त पुण्य को पितरों के कल्याण के लिए समर्पित करने की बात कही जाती है।

इस वर्णन में दशमी के दिन पितरों के लिए श्राद्ध, एकादशी पर उपवास और भगवान विष्णु की पूजा तथा द्वादशी पर फिर से श्राद्ध से जुड़े कर्मों का वर्णन मिलता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com