Arjun (Source. Pinterest)
Arjun Curse: महाभारत से जुड़ी कई कहानियां आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसी ही एक रोचक और कम चर्चित कथा है अर्जुन की मृत्यु, जो उनके ही पुत्र के हाथों हुई थी। लेकिन यह घटना कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान नहीं, बल्कि उसके काफी समय बाद घटी थी। आइए जानते हैं इस पूरी घटना का रहस्य।
महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया, तब इस घटना की शुरुआत हुई। इस यज्ञ के नियम के अनुसार एक विशेष घोड़ा छोड़ा जाता है, जिसे रोकने वाला राजा युद्ध के लिए तैयार माना जाता है। अर्जुन इस घोड़े की रक्षा करते हुए विभिन्न राज्यों में घूम रहे थे और इसी दौरान वे मणिपुर पहुंचे।
मणिपुर में अर्जुन का सामना उनके ही पुत्र बभ्रुवाहन से हुआ, जो उनकी पत्नी चित्रांगदा का बेटा था। शुरुआत में बभ्रुवाहन को यह नहीं पता था कि अर्जुन उनके पिता हैं। जब उन्होंने अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को रोका, तो नियम के अनुसार दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान बभ्रुवाहन ने एक घातक बाण चलाया, जिससे अर्जुन गंभीर रूप से घायल होकर धरती पर गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई।
अर्जुन की मृत्यु के बाद उनकी दूसरी पत्नी उलूपी (नागकन्या) सामने आईं। उन्होंने नागलोक से लाई गई नागमणि की मदद से अर्जुन को फिर से जीवित कर दिया। इसके बाद उलूपी ने इस रहस्य से पर्दा उठाया कि यह सब एक श्राप की वजह से हुआ था।
महाभारत युद्ध में अर्जुन ने भीष्म पितामह को शिखंडी की मदद से हराया था। इसे छल माना गया और इसी कारण गंगा और वसुओं ने अर्जुन को श्राप दिया कि उनकी मृत्यु उनके ही पुत्र के हाथों होगी। उलूपी के अनुसार, बभ्रुवाहन द्वारा अर्जुन का वध उसी श्राप की पूर्ति थी। इस घटना के बाद अर्जुन उस पाप से मुक्त हो गए।
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अर्जुन की यह मृत्यु स्थायी नहीं थी। उनकी असली मृत्यु महाभारत के अंत में हुई, जब भगवान श्रीकृष्ण के स्वर्गारोहण के बाद पांडवों ने महाप्रस्थान शुरू किया। हिमालय की यात्रा के दौरान अर्जुन अपने अहंकार के कारण गिर पड़े और वहीं उनकी अंतिम मृत्यु हुई जैसा कि युधिष्ठिर ने बताया।
यह कथा हमें बताती है कि महाभारत सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि कर्म, श्राप और मोक्ष का गहरा दर्शन भी है। अर्जुन जैसे महान योद्धा को भी अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ा।