पति-पत्नी भूलकर भी ये गलती कभी मत करना, घर बैठे मिल सकता है भगवान का आशीर्वाद, श्री प्रेमानंद जी महाराज की सीख

Husband-Wife Religion: भगवान को पाने के लिए घर-परिवार छोड़कर जंगल या आश्रम जाना चाहिए। लेकिन संतों की शिक्षा कुछ और ही कहती है। श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, सच्ची भक्ति तपस्वियों तक नहीं है।
Husband and wife should never make this mistake even by mistake, teachings from Shri Premananda Ji Maharaj
Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
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Premanand Ji Maharaj Discourse: आज बहुत से लोग मानते हैं कि भगवान को पाने के लिए घर-परिवार छोड़कर जंगल या आश्रम जाना चाहिए। लेकिन संतों की शिक्षा कुछ और ही कहती है। मशहूर संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, सच्ची भक्ति सिर्फ़ तपस्वियों तक ही सीमित नहीं है। एक आम गृहस्थ भी घर में रहते हुए भगवान को पा सकता है। बस ज़रूरत है सोच में बदलाव और भगवान के प्रति भक्ति की।

घर को ही बनाइए भगवान का मंदिर

पारिवारिक जीवन में आध्यात्मिकता का पहला नियम है कि आप जो कुछ भी करें, उसे भगवान को समर्पित कर दें। चाहे वह नौकरी हो, खेती हो, या बिज़नेस हो हर काम सेवा की भावना से करें। आप जो भी कमाते हैं, उसका इस्तेमाल अपने परिवार को सपोर्ट करने में करें, यह मानते हुए कि यह सब भगवान का परिवार है। अगर आप यह भावना बना लें कि आपका घर, परिवार और धन-दौलत सब भगवान कृष्ण की देन हैं, तो जीवन का हर काम पूजा बन जाता है। खाना बनाना, सफाई करना, मेहनत करना सब कुछ भगवान को अर्पण हो जाता है। यही सच्ची भक्ति का रास्ता है।

संगति का जीवन पर गहरा प्रभाव

आध्यात्मिक जीवन में संगति बहुत ज़रूरी है। संत कहते हैं कि ऐसे लोगों की संगति से बचना चाहिए जो शारीरिक सुखों में डूबे रहते हैं। अगर आपको कोई बड़ा संत या गुरु नहीं मिल रहा है, तो कम से कम ऐसे लोगों की संगति करें जिनकी बातचीत भगवान के नाम, भजन और धार्मिक बातों के आस-पास ही घूमती हो। ऐसी संगति मन को शुद्ध करती है और जीवन में अच्छे बदलाव लाती है।

पति-पत्नी का रिश्ता: बराबरी और प्रेम का संबंध

समाज में अक्सर देखा जाता है कि कुछ पुरुष खुद को बेहतर समझते हैं और अपनी पत्नियों के साथ घमंड से पेश आते हैं। लेकिन यह सोच पूरी तरह से गलत है। शास्त्रों में पत्नी को "अर्धंगिनी" कहा गया है, जिसका मतलब है पति के शरीर का आधा हिस्सा। वह किसी भी तरह से कम नहीं है। वह अपने माता-पिता का घर छोड़कर बाकी ज़िंदगी अपने पति के साथ रहती है। इसलिए, उसे ज़बरदस्ती या अधिकार से नहीं, बल्कि प्यार की भाषा से जीतना चाहिए।

दहेज और भ्रूण हत्या से बचने की चेतावनी

दहेज प्रथा समाज की सबसे बड़ी बुराइयों में से एक है। संतों के अनुसार दहेज मांगना या मांगना पाप के बराबर है। बेटी को बोझ या सामान समझना इंसान की गलत सोच को दिखाता है। इसके अलावा, गर्भ में बच्चे को मारना या भ्रूण हत्या को बहुत बड़ा पाप माना जाता है। ऐसे कामों के नतीजे बहुत बुरे होते हैं, और इनसे बचना ही ज़िंदगी का सही रास्ता है।

भगवान की शरणागति के छह नियम

भगवान की सच्ची भक्ति के लिए छह ज़रूरी सिद्धांत बताए गए हैं:

  • ऐसे काम करने का पक्का इरादा करें जिनसे भगवान और गुरु खुश हों।
  • भगवान की मर्ज़ी के खिलाफ कभी काम न करें।
  • भरोसा रखें कि भगवान हमेशा आपकी रक्षा करेंगे।
  • भगवान को अपना रक्षक मानें।
  • अपना तन, मन और आत्मा भगवान को सौंप दें।
  • विनम्रता और नरमी बनाए रखें।

सच्ची भक्ति का फल

शास्त्रों में भगवान ने खुद कहा है कि जो भक्त उन्हें सच्चे दिल से याद करता है, भगवान उसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं "योगक्षेमं वहाम्यहम्।" इसलिए, अगर आप प्यार और भक्ति के साथ अपना काम करते हुए भगवान का नाम लेते रहेंगे, तो आपको भी अपने जीवन में वैसी ही शांति और खुशी महसूस होगी जैसी वृंदावन की धरती पर महसूस होती है।

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