चूहों के बदले ने उजाड़ दिया बहू का घर, फिर पीपल के नीचे हुआ ऐसा चमत्कार कि राजा भी रह गया हैरान

Hariyali Amavasy katha:आज सावन महीने की अमावस्या है। हरियाली अमावस्या से जुड़ी इस पौराणिक कथा में पीपल पूजन, दीपदान और श्रद्धा की विशेष महत्ता बताई गई है।
Hariyali Amavasya Vrat Kath
हरियाली अमावस्या कथा (सौ.AI)
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Hariyali Amavasya Vrat Katha : आज सावन महीने की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या मनाई जा रही हैं। चारों ओर फैली हरियाली के कारण इसे यह नाम मिला हैं। धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से इस दिन स्नान, दान, ध्यान और पीपल के पेड़ की पूजा करने के बाद पवित्र कथा सुनने या पढ़ने से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते है हरियाली अमावस्या की कथा

हरियाली अमावस्या व्रत कथा

राजा के परिवार में बहू का आगमन

पौराणिक कथा के अनुसार, किसी समय की बात है, एक राजा अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी अपने महल में रहता था। उसका एक बेटा था जिसकी शादी हो चुकी थी। एक दिन, राजा की बहू ने रसोई में रखी कुछ मिठाइयां देखीं और वे सब खा गईं।

बहू ने चूहों पर लगाया मिठाई चोरी का आरोप

जब पूछा गया कि मिठाइयां कहां गईं तो उसने कहा कि चूहों ने उन्हें खा लिया है। चूहों ने यह बात सुन ली और झूठे आरोप से बहुत नाराज़ हुए। उन्होंने राजा की बहू को सबक सिखाने का फैसला किया। कुछ दिनों बाद, महल में मेहमान आए और चूहों को लगा कि उसे सबक सिखाने का यह सही मौका है।

चूहों ने रचा बहू को सबक सिखाने का षड्यंत्र

उन्होंने बहू की साड़ी चुरा ली और उसे एक मेहमान के कमरे में रख दिया। जब नौकरों और दूसरों ने अगली सुबह वहां साड़ी देखी, तो वे बहू के चरित्र पर सवाल उठाने लगे। गांव भर में यह बात आग की तरह फैल गई। जब यह खबर राजा तक पहुंची तो उन्हें उसके चरित्र पर शक हुआ और उन्होंने उसे महल से निकाल दिया।

महल से निकलकर पीपल के पेड़ की पूजा

महल छोड़ने के बाद बहू एक झोपड़ी में रहने लगी और नियमित रूप से पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाती थी। वह पूजा करती, गुड़धानी का भोग लगाती और लोगों में प्रसाद बांटती थी। कुछ समय बीतने के बाद, राजा उसी पीपल के पेड़ के पास से गुजरे जहां वह दीपक जलाती थी। उन्होंने पेड़ के पास एक चमकती हुई रोशनी देखी और यह देखकर हैरान रह गए।

राजा ने पेड़ के पास देखी रहस्यमयी रोशनी

महल लौटने पर उन्होंने अपने सैनिकों को उस रोशनी के पीछे का रहस्य पता लगाने का आदेश दिया। राजा के आदेश पर सैनिक उस पेड़ के पास गए, जहाँ उन्होंने दीपकों को आपस में बातें करते हुए सुना। जब हर दीपक ने अपनी कहानी सुनाई तो एक दीपक ने कहा, "मैं राजा के महल से आया हूँ। महल से निकाले जाने के बाद भी, राजा की बहू रोज़ मेरी पूजा करती है और मुझे जलाती है।

दीपकों ने सुनाई पूरी सच्चाई

जब दूसरे दीपकों ने पूछा कि उसे क्यों निकाला गया था तो उस दीपक ने बताया कि एक दिन मिठाई खाने के बाद उसने चूहों पर झूठा आरोप लगा दिया था। इससे नाराज़ होकर चूहों ने बदला लेने के लिए उसकी साड़ी मेहमानों के कमरे में रख दी।

राजा को हुआ अपनी गलती का एहसास

यह पता चलने पर राजा ने उसे महल से निकाल दिया था। यह सुनकर सैनिक हैरान रह गए और महल लौटकर राजा को पूरी कहानी सुनाई। अपनी गलती का एहसास होने पर राजा ने अपनी बहू को वापस महल बुला लिया। इस तरह, पीपल के पेड़ की नियमित पूजा का फल राजा की बहू को मिला और वह आराम से रहने लगी।

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