गुरुवार को क्यों माना जाता है इतना शुभ? (सौ.सोशल मीडिया) 
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क्या गुरुवार और रविवार को खिचड़ी खाना माना जाता है अशुभ? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Guruwar Ko Khichdi In Hinduism: क्या गुरुवार और रविवार को खिचड़ी खाना अशुभ माना जाता है? हिंदू धर्म में कुछ दिनों से जुड़ी विशेष मान्यताएं प्रचलित हैं। जानिए इस विशेष दिनों से जुड़ी मान्यता।

सीमा कुमारी

Khichdi Se Judi Dharmik Manyata: खिचड़ी को आमतौर पर हल्का और पौष्टिक भोजन माना जाता है, इसलिए कई लोग इसे बिना किसी सोच-विचार के कभी भी खा लेते हैं। लेकिन हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सप्ताह के कुछ ऐसे दिन भी बताए गए हैं जब खिचड़ी खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि खास तौर पर गुरुवार और रविवार के दिन खिचड़ी खाने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन दिनों कुछ विशेष प्रकार की खिचड़ी का सेवन ग्रहों के शुभ प्रभाव को कम कर सकता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता क्या है।

गुरुवार को क्यों माना जाता है इतना शुभ?

गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु यानी बृहस्पति देव को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, समृद्धि, सुख और सौभाग्य का कारक ग्रह बताया गया है। इस दिन लोग भगवान विष्णु, देव गुरु बृहस्पति और भगवान सत्यनारायण की पूजा करते हैं। कई श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते हैं, पीले रंग की वस्तुओं का दान करते हैं और बृहस्पति की कृपा पाने के लिए व्रत भी रखते हैं।

गुरुवार को खिचड़ी खाने से क्यों किया जाता है परहेज?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरुवार के दिन खिचड़ी खाने से बचने की सलाह दी जाती है। खासकर ऐसी खिचड़ी जिसमें काली दाल का इस्तेमाल किया गया हो, उसे इस दिन शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे बृहस्पति ग्रह का शुभ प्रभाव कमजोर पड़ सकता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इस दिन खिचड़ी खाने से आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं और घर में सुख-समृद्धि पर असर पड़ सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

रविवार को खिचड़ी खाने को लेकर क्या कहती हैं मान्यताएं?

हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना गया है। सूर्य को ऊर्जा, सम्मान और सफलता का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यदि रविवार के दिन काली दाल वाली खिचड़ी खाई जाए तो सूर्य ग्रह का प्रभाव कमजोर हो सकता है, क्योंकि काली दाल का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है और सूर्य तथा शनि को परस्पर विरोधी ग्रह माना गया है।

धार्मिक आस्था है, अनिवार्य नियम नहीं

गुरुवार और रविवार को खिचड़ी न खाने की परंपरा मुख्य रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। कई लोग आज भी श्रद्धा और आस्था के कारण इन नियमों का पालन करते हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल पारंपरिक मान्यता मानते हैं।

ऐसे में इन बातों को व्यक्तिगत आस्था और विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यदि आप इन मान्यताओं में विश्वास रखते हैं, तो उनका पालन कर सकते हैं।

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