Guru Purnima 2026: महाभारत और 18 पुराणों के रचयिता थे महर्षि वेद व्यास, जानिए उनके जन्म की रोचक कथा

Guru Purnima: गुरु पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। आइए जानते हैं महर्षि व्यास के जन्म की रोचक कथा।
Guru purnima 2026 maharishi ved vyasa birth story
गरु पूर्णिमा (फोटो.सोशल मीडिया)
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Guru Ved Vyas Birth Story: गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित किया जाता है। इसी दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन किया, महाभारत की रचना की और 18 महापुराणों का संकलन किया। इसी कारण उन्हें प्रथम गुरु का स्थान प्राप्त है।

कौन थे महर्षि वेदव्यास?

सनातन धर्म में महर्षि वेदव्यास का स्थान सर्वोपरि है। उनका मूल नाम कृष्ण द्वैपायन था। श्याम वर्ण और द्वीप पर जन्म होने के कारण उन्हें कृष्ण द्वैपायन कहा गया। आगे चलकर वेदों का विभाजन करने के कारण उनका नाम वेद व्यास पड़ा और महाभारत काल से वे महर्षि वेद व्यास के नाम से प्रचलित है।

क्या है महर्षि वेदव्यास की जन्म कथा?

धार्मिक कथाओं के अनुसार महर्षि वेदव्यास के पिता महर्षि पराशर और माता सत्यवती थीं। सत्यवती यमुना नदी में नाव चलाने का काम करती थीं। एक दिन महर्षि पराशर नदी पार कर रहे थे। यात्रा के दौरान उन्होंने अपने तपोबल से चारों ओर धुंध फैला दी ताकि कोई उन्हें देख न सके। इसके बाद यमुना के बीच स्थित एक द्वीप पर सत्यवती ने एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया, जो आगे चलकर महर्षि वेदव्यास कहलाए। उन्होंने महाभारत के साथ-साथ 18 पुराणों की भी रचना की।

कैसे पड़ा वेदव्यास नाम?

महर्षि वेद व्यास ने जन्म के बाद शीघ्र ही तपस्या का मार्ग अपनाया। उन्होंने मानव कल्याण के लिए एक ही वेद को चार भागों में- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद, विभाजित किया।

महर्षि वेदव्यास का योगदान

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता का अमूल्य ज्ञान भी शामिल है। इसके अलावा उन्हें 18 महापुराणों, ब्रह्मसूत्र और कई अन्य ग्रंथों का रचयिता माना जाता है। उनके परम ज्ञान का परिणाम ही है कि वैदिक ज्ञान आम लोगों तक पहुंच सका।

गुरु पूर्णिमा पर क्यों किया जाता है उनका स्मरण?

गुरु पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते हैं और उनसे प्राप्त ज्ञान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इसी वजह से इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

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