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गणगौर व्रत कल, आखिर पति से छुपाकर क्यों रखा जाता है यह व्रत? जानिए क्या है इस परंपरा का महत्व

Gangaur Vrat Importance: गणगौर व्रत में महिलाएं गुप्त रूप से माता गौरी की पूजा कर पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। मान्यता है कि इसे छुपाकर रखने से व्रत का फल अधिक मिलता है।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Mar 20, 2026 | 10:12 PM

गणगौर व्रत(सौ.AI)

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Gangaur Vrat Kab Hai:21 मार्च को गणगौर व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में गणगौर व्रत को अत्यंत पवित्र माना जाता है। खासतौर पर राजस्थान में गणगौर व्रत बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह व्रत खासतौर पर सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखा जाता है।

लेकिन इस व्रत की एक अनोखी परंपरा है कि इसे पति से छुपाकर रखा जाता है। तो आइए जानते हैं कि आखिर क्यों महिलाएं गणगौर पूजा का व्रत अपने पति से छुपाकर रखती हैं और क्या है इस परंपरा का महत्व।

  • गणगौर व्रत कब रखा जाएगा

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2026 में गणगौर व्रत चैत्र शुक्ल तृतीया को 21 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन को बड़ी गणगौर भी कहा जाता है। पूरे 18 दिनों तक चलने वाले गणगौर पर्व का मुख्य उत्सव इसी तिथि को होता है।

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  • आखिर पति से छुपाकर क्यों रखा जाता है व्रत

लोक मान्यता के अनुसार, गणगौर व्रत की सबसे बड़ी खासियत है कि, महिलाएं इस व्रत को अपने पति से छुपाकर रखती हैं। मान्यता है कि यदि व्रत गुप्त रूप से किया जाए तो इसका पूर्ण फल मिलता है।

महिलाएं इस दिन मिट्टी की शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनका श्रृंगार करती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं। पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद भी पुरुषों को नहीं दिया जाता।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से व्रत पूर्ण फलदायी होता है, माता पार्वती के आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है।

  • गणगौर व्रत पति से छुपाकर करने की वजह

शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए यह व्रत रखा था। उन्होंने पूजा विधिपूर्वक की, लेकिन भगवान शिव को इसके बारे में नहीं बताया। वे इसे गुप्त रूप से पूरा करना चाहती थीं। इसी कारण से आज भी सुहागिन महिलाएं गणगौर व्रत और पूजा छुपाकर करती हैं।

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  • प्रसाद और गुने का महत्व

गणगौर पूजा में जो प्रसाद अर्पित किया जाता है, उसे केवल महिलाएं ही ग्रहण करती हैं। पूजा में चढ़ाए गए सिंदूर से महिलाएं अपनी मांग भरती हैं, जिसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

राजस्थान में इस दिन गुने बनाए जाते हैं। गुने मैदा, बेसन और हल्दी से बनाए जाते हैं और गहनों के आकार में माता पार्वती को अर्पित किए जाते हैं। जितने अधिक गुने अर्पित किए जाते हैं, घर में उतनी ही सुख-समृद्धि आती है। पूजा के बाद ये गुने महिलाएं अपनी सास, ननद या जेठानी को देकर आशीर्वाद लेती हैं।

Gangaur vrat why women hide fast from husband know tradition importance

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Published On: Mar 20, 2026 | 10:12 PM

Topics:  

  • Dharma
  • Gangaur Vrat
  • Religion News

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