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चातुर्मास का समापन, देवउठनी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में करें पूजा, यह विशेष मंत्र दिलाएगा यश और वैभव

हिन्दू धर्म में देवउठनी एकादशी का महत्व इसलिए है, क्योंकि इस दिन ‘चातुर्मास’ का समापन के साथ ही भगवान विष्णु योग निद्रा जाग से जाते हैं। इसके बाद से ही सभी मांगलिक और शुभ कार्य शुरु हो जाते हैं। कहा जाता है कि यदि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर कुछ कार्य किए जाए, तो मानो व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है।

  • By सीमा कुमारी
Updated On: Nov 11, 2024 | 04:32 PM

चातुर्मास का समापन, देवउठनी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में करें पूजा

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Dev Uthani Ekadashi 2024:कल 12 नवंबर 2024 को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। सभी एकादशियों व्रत में देवउठनी एकादशी का बड़ा महत्व है। यह एकादशी हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी की तिथि को मनाई जाती है।

ज्योतिषयों की मानें तो, हिन्दू धर्म में देवउठनी एकादशी का महत्व इसलिए है, क्योंकि इस दिन ‘चातुर्मास’ का समापन के साथ ही भगवान विष्णु योग निद्रा जाग से जाते हैं। इसके बाद से ही सभी मांगलिक और शुभ कार्य शुरु हो जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भक्त उपवास करते हैं, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और सुख, समृद्धि, खुशी के लिए प्रार्थना करते हैं। यह एकादशी हिंदू संस्कृति में विवाह के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है।

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ऐसा कहा जाता है कि यदि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर कुछ कार्य किए जाए, तो मानो व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है। आइए जानते हैं उन विशेष कार्यों के बारे में-

देवउठनी एकादशी पर जरूर करें ये काम

देवउठनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें।

इस पावन तिथि की सुबह श्री हरि को उनके वैदिक का जाप कर जगाएं।

इस दिन सबसे पहले अपने हेथेलियों का दर्शन करें और श्री हरि को याद कर उन्हें प्रणाम करें।

हथेलियों को देखते हुए इस मंत्र ”कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविंदः प्रभाते करदर्शनम् ॥ का जाप करें।

ज्योतिषयों का मानना है कि, इन कार्यों को करने से व्यक्ति की किस्मत धीरे-धीरे बदलने लगती हैं और उन्हें जीवन भर किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके साथ ही धन-दौलत में दिन-रात बढ़ोत्तरी होती है। इसलिए, इस शुभ अवसर पर इन कार्यों को करने की पूर्ण कोशिश करें, जिसके लाभ आपको जल्द ही दिखना शुरू हो जाएंगे।

देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व

बता दें कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु पूरे चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद विष्णु जी देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। इन माह को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है।

इसे भी पढ़ें : देवउठनी एकादशी की ये है सही तिथि, इस दिन क्या न करें, जान लें 

चातुर्मास के दौरान कोई शादी विवाह समेत कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद से सभी मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। इस दिन विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से घर में संपदा, संपन्नता और समृद्धि बनी रहती है।

 

End of chaturmas worship in brahma muhurta on devuthani ekadashi

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Published On: Nov 11, 2024 | 04:32 PM

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