

Highlights :
धनतेरस पर यमराज को समर्पित दीपदान करने की परंपरा है।
यम दीपदान शाम के समय जलाई जाती है।
यह दीपक दक्षिण दिशा की ओर जलाते हैं।
यम दीपदान राजा हेम के पुत्र की पौराणिक कथा से जुड़ी है।
यह परंपरा परिवार के कल्याण, सुख और मंगलकामना से जुड़ी है।
Yam Deepak Ki Katha: धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने के साथ ही यम दीपदान की परंपरा भी निभाई जाती है। इस दिन कई घरों में शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यम दीपदान भगवान यमराज को समर्पित होता है और इसे परिवार की सुख-समृद्धि तथा मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है।
लेकिन धनतेरस पर यम दीपदान क्यों किया जाता है? इसके पीछे कौन-सी पौराणिक कथा प्रचलित है और इस परंपरा को किस तरह निभाया जाता है? आइए जानते हैं।
हिंदू परंपरा में धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ यमराज के नाम से दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि शाम के समय दीपक जलाकर यमराज से परिवार के सदस्यों के कल्याण और सुखमय जीवन की प्रार्थना की जाती है। यह परंपरा जीवन के प्रति सम्मान और परिवार की मंगलकामना का प्रतीक मानी जाती है।
यम दीपदान से जुड़ी एक प्रचलित पौराणिक कथा राजा हेम के पुत्र से संबंधित है। कथा के अनुसार, राजा हेम के पुत्र की कुंडली में विवाह के बाद कुछ दिनों में मृत्यु होने की आशंका बताई गई थी। जब राजकुमार का विवाह हुआ, तो उनकी पत्नी को इस भविष्यवाणी की जानकारी थी। उसने अपने पति की रक्षा के लिए पूरी रात जागकर दीपक जलाए और घर के द्वार पर सोने-चांदी के आभूषण तथा अन्य चमकदार वस्तुएं रख दीं।
लोकप्रचलित कथा के अनुसार, जब यमराज राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे, तो दीपकों की रोशनी और चमकदार वस्तुओं के कारण उनका ध्यान दूसरी ओर चला गया। राजकुमार की पत्नी के प्रयासों और भक्ति से प्रभावित होकर यमराज वापस लौट गए। इस कथा को धनतेरस पर दीपदान की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, यह एक धार्मिक लोककथा है, ऐतिहासिक घटना का प्रमाण नहीं।
परंपरा के अनुसार, धनतेरस की शाम मिट्टी के दीपक में तेल या घी डालकर उसे जलाया जाता है। कई परिवार घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखते हैं। दीपक जलाते समय यमराज का स्मरण करके परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है। पूजा की विधि और दीपक रखने के तरीके में अलग-अलग क्षेत्रों में अंतर हो सकता है।
यम दीपदान की परंपरा जीवन के महत्व, परिवार के प्रति प्रेम और मंगलकामना का संदेश देती है। दीपक अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक भी माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धा और सकारात्मक भाव के साथ दीपदान किया जा सकता है।