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समुद्र मंथन से जुड़ी है भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने की कथा
धनतेरस पर झाड़ू, नमक, धनिया, हल्दी और धातु खरीदना क्यों माना जाता है शुभ?
शाम 6:02 से 7:58 बजे तक करें भगवान धन्वंतरि की पूजा
धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें? जानें दीपदान, खरीदारी और पूजा से जुड़ी मान्यताएं
Dhanteras Remedies For Wealth And Prosperity: कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है।
धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। धार्मिक लोकमान्यताओं के अनुसार इस दिन वस्तु खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर लोग धनियां के बीज खरीद कर भी घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।
कहा जाता है कि समुद्र मन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, यही कारण है कि धनतेरस को भगवान धन्वन्तरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है।
धनतेरस यानी धन्वंतरि त्रयोदशी का त्योहार सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी और पूजा घर में सालभर बरकत बनाए रखती है। प्रयागराज की प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य शिप्रा सचदेव ने धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें, इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी है-
शिप्रा सचदेव ने बताया कि धनतेरस के दिन सुबह से ही खरीदारी की जा सकती है। इस साल धनतेरस पर पूरे दिन खरीदारी का शुभ योग है। सिर्फ सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक के समय को छोड़कर किसी भी समय खरीदारी कर सकते है।
उन्होंने कहा कि धनतेरस पर पांच चीजें अवश्य खरीदकर घर लानी चाहिए। सबसे पहले झाड़ू, दूसरी चीज नमक, तीसरी धनिया, चौथी हल्दी और पांचवीं धातु से बनी कोई भी वस्तु। इन पांच चीजों का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है।
शिप्रा सचदेव ने बताया कि झाड़ू राहु का प्रतीक होता है। यह घर से नकारात्मकता को दूर करता है और मां लक्ष्मी का सूचक माना जाता है। झाड़ू खरीदने से राहु संतुलित होता है और घर में अच्छी ग्रोथ आती है। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू जरूर लाना चाहिए।
नमक शनि का प्रतीक होता है। यह नकारात्मकता को दूर करता है और घर में किसी भी चीज की कमी नहीं होने देता। मान्यता है कि धनतेरस पर नमक खरीदने से शनि की शुभ दृष्टि बनी रहती है।
धनिया बुध और भगवान गणेश का प्रतीक है। धनिया से घर में सुख, समृद्धि, वैभव और बुद्धि का विकास होता है। जब हमारी बुद्धि सही रहती है, तो जीवन के सभी कार्य सही ढंग से पूरे होते हैं। इसलिए धनतेरस पर धनिया खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।
हल्दी गुरु का प्रतीक है और भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इससे घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। इसलिए धनतेरस पर हल्दी अवश्य लेकर आनी चाहिए।
शिप्रा सचदेव ने बताया कि अन्य चीजें समय के साथ खराब हो जाती हैं, लेकिन धातु लंबे समय तक चलती है, कभी खराब नहीं होती। इसलिए सोना, चांदी, तांबा या पीतल से बनी कोई भी वस्तु अवश्य खरीदनी चाहिए, ताकि घर में बरकत हमेशा बनी रहे।
उन्होंने बताया कि शाम को पूजा का शुभ मुहूर्त 6 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस समय पूजा करना सबसे उत्तम रहेगा। इस दौरान भगवान धन्वंतरि की पूजा अवश्य करनी चाहिए, ताकि निरोगी काया मिले और घर में किसी को लंबे समय से चली आ रही बीमारी से मुक्ति मिले। सकारात्मक ऊर्जा के लिए पूजा के समय चौमुखी दीया घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ अवश्य जलाना चाहिए।